मोदी का एक ही एजेंडा है, नोटबंदी के फैसले का बचाव करना

सिद्धांत मोहन, TwoCircles.net

वाराणसी : केंद्र सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद सामाजिक स्तर पर बहुत ज्यादा परेशानियां और बनारसी शब्दों में कहें तो सरकार की भद्द हुई है, लेकिन केंद्र सरकार का हर मंत्रालय इस समय नोटबंदी के फैसले को बचाने में जुटा हुआ दिख रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बनारस में थे. मोटामोटी तौर पर देखें तो पहले वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित स्वतंत्रता भवन में राष्ट्रीय संस्कृति समारोह में शिरकत करने पहुंचे. उसके बाद वे डीरेका गए और कई सारी योजनाओं का शिलान्यास किया और बाद में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ भोजन किया.

लेकिन इस पूरे कार्यक्रम का जो मिजाज़ रहा, वह यह कि लगभग हर मौके पर नरेंद्र मोदी नोटबंदी के फैसले के पक्ष में बल्लेबाजी करते नज़र आए. स्वतंत्रता भवन में अपने भाषण से लेकर कार्यकर्ताओं के बीच खाना खाने तक नरेंद्र मोदी इस फैसले को सही और इसका विरोध करने वालों को गलत साबित करते नज़र आए.

नोटबंदी के फैसले के बाद आरबीआई लगभग 60 नियम ला चुकी है. इनमें से कई नियम पिछले नियमों को पलटकर लाए गए हैं, जिन्हें विपक्ष ‘यू-टर्न’ करार दे रहा है. लेकिन आत्मावलोकन से परे जाकर नरेंद्र मोदी नोटबंदी से अलग जाकर बात करने वाले हर शख्स को लपेट रहे हैं. स्वतंत्रता भवन में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इस देश के राजनीतिक दल इस क़दर भ्रष्टाचारियों के साथ खड़े होंगे.

उन्होंने नोटबंदी का विरोध कर रहे लोगों को अपने पार्टी के पेशेवर नेताओं की तरह पाकिस्तान से जोड़ दिया.

‘लालू-स्टाइल’ फॉलो करते मोदी

ज्ञात हो कि विपक्ष की ओर से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नोटबंदी के फैसले का सबसे मुखर विरोध किया है. लिहाजा नरेंद्र मोदी के लिए राहुल गांधी का मज़ाक उड़ाना ज़रूरी था. उन्होंने जिस लहजे में राहुल गांधी का मज़ाक उड़ाया, वह थोड़ा-बहुत उस लहज़े से मिलता था जिसका इस्तेमाल करते हुए लालू यादव ने बिहार विधानसभा चुनावों के वक़्त खुद नरेंद्र मोदी का मज़ाक उड़ाया था. राहुल गांधी का मज़ाक उड़ाते वक़्त भी नरेंद्र मोदी नोटबंदी की मुश्किलों के सवालों से बचते हुए निकल गए और सामने मौजूद विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों के ठहाकों को उन्होंने अपनी उपलब्धि के तौर पर गिना.

कार्यकर्ताओं के साथ भोजन और बैठक के बाद भी नरेंद्र मोदी ने कार्यकर्ताओं के बीच भी कैशलेस इकॉनमी की बातें की और उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ता जाकर लोगों को कैशलेस बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के बारे में जानकारी दें. यानी यहां भी नरेंद्र मोदी अपने निर्णय को सही साबित करने के पीछे अड़े रहे.

नरेंद्र मोदी का यह पांचवां बनारस दौरा कुल मिलाकर उनकी हर चुनावी रैली जैसा रहा. 8 नवम्बर के बाद से उन्होंने हर चुनावी रैली में अपने फैसले को बचाने की कवायद की है. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय – यानी एक शिक्षण संस्थान के प्रांगण में भी – वे यही करते दिखे.

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