बेगुनाहों को छोड़ने के नाम पर अखिलेश सरकार कर रही है मुसलमानों से धोखा

TwoCircles.net Staff Reporter

लखनऊ : जनवरी 2016 में आतंकवाद के झूठे आरोपों में 9 सालों तक जेल में रहने के बाद बरी हुए मुस्लिम युवकों नौशाद, जलालुद्दीन, मोहम्मद अली अकबर हुसैन, शेख़ मुख्तार, अज़ीजुर्रहमान सरदार और नूर इस्लाम मंडल के ख़िलाफ़ सपा सरकार ने हाईकोर्ट में अपील कर दी है. जिसकी सुनवाई की तारीख 31 जनवरी 2017 को नियत है.


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अपील में जाने के इस मामले को लखनऊ की सामाजिक-राजनीतिक संगठन रिहाई मंच ने मुसलमानों के साथ धोखा क़रार दिया है. साथ ही मंच ने अपर महाधिवक्ता ज़फ़रयाब ज़ीलानी के उस दावे पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें उन्होंने पांच हज़ार बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को सरकार द्वारा रिहा किए जाने का दावा किया है.

रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज़ आलम ने जारी बयान में कहा है कि सरकार मुस्लिम समाज से इस बात को छुपा रही थी कि वह किसी तरह के अपील में गई है या जाना चाहती है. लेकिन इस बात की ख़बर आने के बाद कि सरकार अपील में जा रही है, तब रिहाई मंच के अध्यक्ष और इन युवकों के वकील मोहम्मद शुऐब से खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा अपरमहाधिवक्ता ज़फ़रयाब ज़ीलानी ने कहा था कि सरकार बरी हुए लोगों के ख़िलाफ़ अपील में नहीं जाएगी. कुछ लोगों ने बिना उन्हें संज्ञान में लाए अपील दायर कर दिया है जिसे सरकार वापस लेने जा रही है. लेकिन इस वादे के बावजूद सरकार ने बजाए लीव टू अपील की याचिका वापस लेने के उसे 10 नवम्बर 2016 को न्यायालय में स्वीकार कराया और छूटे हुए नौजवानों के ख़िलाफ़ वारंट जारी करा दिया है, जिस पर 31 जनवरी 2017 को अदालत में उनकी हाज़िरी होगी.

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि सपा ने 2012 के चुनावी घोषणा-पत्र में वादा किया था कि आतंकवाद के नाम पर फंसाए गए बेगुनाह मुस्लिम युवकों को वह सरकार में आते ही छोड़ देगी. लेकिन वो ना सिर्फ़ अपने वादे से मुकर गई बल्कि जो लोग खुद अपने क़ानूनी प्रयासों से बरी हुए उनके ख़िलाफ़ भी सरकार हाईकोर्ट जा रही है, जो साबित करता है कि सपा सरकार बेगुनाह मुस्लिमों को जेल में रखने पर आमादा है.

उन्होंने कहा कि एक तरफ़ तो सपा सरकार बरी हुए बेगुनाह मुस्लिम युवकों को जेल में डालने की साजिश रच रही है तो वहीं दूसरी तरफ़ अपर महाधिवक्ता ज़फ़रयाब जीलानी मुसलमानों में यह अफ़वाह फैला रहे हैं कि सपा सरकार ने पांच हज़ार बेगुनाह मुसलमानों को रिहा कर दिया है. जो मुसलमानों को ठग कर वोट लेने की एक और नापाक हरकत है.

उन्होंने कहा कि इस ठगी की साज़िश के तहत राज्य सूचना विभाग की तरफ़ से छापी गई उर्दू पत्रिका ‘नई उमंग’ में ज़फ़रयाब जीलानी का एक इंटरव्यू छापा गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि अखिलेश सरकार ने पांच हज़ार बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को रिहा कर दिया है. जबकि सच्चाई तो यह है कि इतने बेगुनाह मुस्लिम नौजवान तो पूरे देश में आतंकवाद के आरोप में नहीं बंद हैं जो साबित करता है कि क़ौम के नाम पर सरकारी रियायतें लेने वाले अपर महाधिवक्ता को उनकी अपनी क़ौम से जुड़े मसलों की भी कोई जानकारी नहीं है.

शाहनवाज़ आलम ने यह भी आरोप लगाया कि इस पत्रिका को सपा कार्यकर्ताओं द्वारा दूर-दराज के पिछड़े इलाकों के गांवों में मदरसों से सम्बंधित शिक्षकों और छात्रों को गुमराह करके भोले-भाले अशिक्षित मुसलमानों से वोट लेने के लिए बंटवाया जा रहा है. उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि नई उमंग की प्रतियों को सपा के प्रचार चुनाव की सामग्री मानकर उस पर होने वाले खर्च को सपा से वसूल करे तथा उस खर्च को भी चुनावी खर्च में जोड़े तथा सरकारी पद पर रहते हुए राजनीतिक दल के पक्ष में झूठे प्रचार करने के आरोप में पत्रिका के संरक्षक नवनीत सहगल प्रमुख सचिव सूचना, पत्रिका के प्रकाशक सुधीश कुमार झा, निदेशक सूचना एंव जनसम्पर्क और पत्रिका के एडीटर सुहेल वहीद, सहायक निदेशक सूचना के खिलाफ कार्यवाई करे.

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