मिड-डे मील पाना है तो आधार कार्ड दिखाओ

फहमिना हुसैन, TwoCircles.net

दिल्ली : भारत में साल 1995 में शुरु की गई मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) स्कीम विश्व में इस किस्म की सबसे बड़ी योजना मानी जाती है परन्तु मौजूदा केंद्र सरकार ने इस योजना में नये नियम को लागू कर दिया है. केंद्र सरकार के नए नियम के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मिल के लिए आधार कार्ड अनिवार्य हो गया है.

यह फैसला मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देशभर के सभी सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मिल के लिए लिया है.

मंत्रालय द्वारा कहा गया है कि जिन बच्चों के पास आधार नहीं हैं, उन्हें आधार बनवाना होगा. इसके लिए राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे आधार पंजीकरण के लिए ऐसे बच्चों को सुविधा उपलब्ध कराएं. जब तक बच्चों का आधार पंजीकरण नहीं हो जाता तब तक वे अन्य पहचान पत्र दिखाकर भोजन पा सकते हैं. अभिभावक को यह शपथ पत्र देना होगा कि बच्चा किसी अन्य स्कूल से यह सुविधा नहीं ले रहा है.

मिड डे मील स्कीम के तहत देश में 12 लाख स्कूलों के 12 करोड़ बच्चों को दोपहर का खाना दिया जाता है. इस योजना पर सरकार सालाना करीब साढ़े नौ हजार करोड़ रुपये खर्च करती है. आठवीं तक के बच्चों को इस योजना के तहत खाना मिलता है.

मौजूदा सरकार का कहना है कि देश में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए वो सभी योजनाओं को आधार से जोड़ रही है, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मिड डे मील जैसी योजना में आधार को जरूरी बनाना बहुत गलत है, क्योंकि इससे देश के बहुत गरीब और जरूरतमंद बच्चे इसके फायदे से महरूम रह जाएंगे.

इस नए प्रावधान के तहत जब तक आधार कार्ड नहीं बनता तब तक अभिभावकों को शपथपत्र देना होगा. 30 जून के बाद अगर किसी बच्चे का आधार नंबर नहीं है तो उसके अभिभावक को आधार रजिस्ट्रेशन स्लिप दिखानी होगी ताकि पता चल सके कि आधार नंबर के लिए आवेदन किया गया है या नहीं.

वास्तव में देखा जाये तो सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाओं को आधार कार्ड से जोड़ने को अनिवार्य बना दिया गया है. जबकि वास्तव में, इससे होने वाले नुकसान और वंचित रह जाने वालों की एक लंबी लिस्ट बनती जा रही है. जैसे- आधार के बिना बुज़ुर्ग पेंशन की सूची से हटा दिए गए हैं, मनरेगा श्रमिकों को आधार में हुई छोटी–छोटी गलतियों के कारण उनकी मज़दूरी से इनकार किया जा रहा है, और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कार्ड धारकों को बॉयोमेट्रिक प्रमाणीकरण में तकनीकी खामियों के कारण खाद्य सुरक्षा व राशन से वंचित किया जा रहा है.

वर्तमान में होने वाली इन परेशानियों के बढ़ने के बावजूद सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है.

इतना ही नहीं दिल्ली रोजी रोटी अभियान ने पीडीएस योजना में आधार की अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली हाइकोर्ट में याचिका दी है जिसमे मिड डे मील में आधार कार्ड अनिवार्य बनाने की इस अधिसूचना को तत्काल वापस लेने की सरकार से अपील की है, साथ ही राज्य सरकारों से इसे लागू न करने की भी मांग की है.

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