ठाकुरगंज ‘मुठभेड़’ पर रिहाई मंच के यूपी पुलिस से दस सवाल

TCN News

लखनऊ : मानवाधिकार संगठन रिहाई मंच ने लखनऊ के ठाकुरगंज में हुए कथित मुठभेड़ पर गहराते सवालों के मद्देनजर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. कथित मुठभेड़ में आईएसआईएस का आतंकी बताकर युवक को मारने के बाद अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था दलजीत चौधरी ने कहा कि उसके आईएसआईएस से जुड़े होने का कोई सुबूत नहीं मिला है, इस घटना को रिहाई मंच ने संदिग्ध करार दिया है. रिहाई मंच ने हाल में ही ठाकुरगंज का दौरा किया है और वे इसे जल्दी ही जांच रिपोर्ट के माध्यम से सामने लाने की बात कह रहे हैं.

रिहाई मंच अध्यक्ष वकील मो. शुऐब, जैद अहमद फारूकी, शबरोज मोहम्मदी, सैयद मो वासी, शिराज़ बाबा ने ठाकुरगंज का दौरा करने और स्थानीय लोगों से मुलाकात के बाद ये 10 अहम सवाल उठाए हैं, जो उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को संबोधित हैं.

1. स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्होंने एटीएस से कहा कि लड़का सीधा-सादा है और वे लोग उससे बात करके उससे आत्मसमर्पण करा देंगे. लेकिन एटीएस ने उनकी बात को खारिज कर दिया. क्या एटीएस उसे जिंदा नहीं पकड़ना चाहती थी?

2. कथित आतंकी के पड़ोसी कय्यूम, जो उससे किराया भी वसूला करते थे, को उनके परिवार समेत वहां से हटाकर किसी अनजान जगह पर क्यों रखा गया है? आखिर उनके पास ऐसी कौन-सी जानकारी है, जिसका सार्वजनिक होना पुलिस ठीक नहीं समझती है ?

3. एटीएस का दावा है कि सैफुल्ला घर के अंदर के कमरे में छुपा हुआ था. ऐसे में सवाल उठता है कि वह किस तरह से और किस तरफ से एटीएस वालों पर गोली चला रहा था? या पुलिस उस पर किस तरह से और किस तरफ से निशाना साधकर गोली चला रही थी? यह सवाल तब और भी अहम हो जाता है जब घर की दीवार और दरवाजों पर किसी तरह के कोई निशान नहीं हैं? सवाल उठता है कि क्या सिर्फ लोगों में दहशत पैदा करने और पूरे नाटक को वास्तविक दिखाने के प्रयास के तहत पुलिस ने हवाई फायरिंग की? अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर चली हुई गोलियों के निशान आखिर दिवारों और दरवाजों पर क्यों नहीं हैं?

4. मीडिया और अन्य लोगों को मकान के अंदर क्यों नहीं जाने दिया जा रहा है?

5. खबरों के मुताबिक दोपहर करीब 2 बजे तक पड़ोसी किराएदार के घर में बाप-बेटे में झगड़ा होने पर पहुंची पुलिस ने वहां मौजूद कथित आतंकी से भी पूछताछ की और झगड़े को सुलझाए जाते वक्त भी वह वहीं पर मौजूद था. सवाल उठता है कि अगर वह सचमुच आतंकी होता और उसके गिरोह के लोग किसी ट्रेन में विस्फोट कर चुके होते तो वह पुलिस के सामने पंचायत करवाता? या उनसे बचने की कोशिश करते हुए वहां से हट जाता?

6. उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक उन्हें मध्यप्रदेश की पुलिस से सूचना मिली थी कि सैफुल्ल आतंकी है. लेकिन सवाल उठता है कि सिर्फ नाम के आधार पर ही पुलिस को बिल्कुल सटीक जानकारी कैसे मिल गई कि वह उसी मकान में रहता है? क्योंकि पुलिस और पड़ोसियों के मुताबिक पुलिस ने किसी दूसरे घर की तरफ झांका भी नहीं और ना किसी से कोई पूछताछ ही की, वह सीधे उसी घर पर पहुंच गई? क्या इसे स्वाभाविक कहा जा सकता है?

7. पुलिस के मुताबिक कथित आतंकी की हत्या रात को मुठभेड़ के दौरान हुई लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि हत्या तकरीबन 5 बजे शाम को ही हो गई थी. आखिर लोगों में यह धारणा क्यों है, वे पुलिस के दावे से असहमत क्यों हैं?

8. पुलिस के मुताबिक़ उन्होंने मिर्ची बम का इस्तेमाल किया क्योंकि वह चाहती थी कि आतंकी को जिंदा पकड़े. लेकिन घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर रहने वाले स्थानीय लोगों के मिर्ची बम के कारण उनको भी सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. सवाल उठता है कि एटीएस ने इतनी मात्रा में मिर्ची बम का इस्तेमाल क्यों किया जिससे कि उस छोटे से कमरे के अंदर मौजूद व्यक्ति का जिंदा रहना नामुमकिन हो जाए? क्या एटीएस ने ऐसा जानबूझकर किया, क्या वो कथित आतंकी को जिंदा नहीं पकड़ना चाहती थी?

9. एटीएस के मुताबिक उसने मारे गए आतंकी से उसका रोज का टाइम टेबल हासिल कर लिया है, जिसे वो अपनी बड़ी कामयाबी मानती है. पुलिस ने अपनी उपलब्धि के तौर पर उक्त टाइमटेबल को तमाम मीडिया समूहों और पत्रकरों को वाट्सएप पर भी भेजा है. जबकि इस टाइम टेबल में कथित आतंकी के सोने, जगने, कसरत करने, मार्निंग वॉक करने, नमाज पढ़ने, दोस्तों से धार्मिक विषयों पर बात करने, नाश्ता करने, खाना बनाने, खाना खाने का समय लिखा है. पुलिस किस आधार पर इस टाइम टेबल को आतंकी सुबूत मान रही है?

10. पुलिस यह क्यों नहीं बता पा रही है कि मारा गया कथित आतंकी जबड़ी में हुए कथित ट्रेन विस्फोट से कैसे जुड़ा था?

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