देवबंद में भाजपा की जीत, क्या है सचाई?

आस मोहम्मद कैफ, TwoCircles.net

देवबंद/ सहारनपुर : ईवीएम में गड़बड़ी के सवालों के बीच देवबंद चर्चा में है. बसपा सुप्रीमो मायावती अपने आरोपो में इसका जिक्र कर चुकी हैं. इस्लामिक धार्मिक शिक्षा के केंद्र देवबंद में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं. यहां से भाजपा के कुंवर बृजेश सिंह चुनाव जीत गए हैं. दूसरे स्थान पर बसपा के माजिद अली रहे हैं, जिनकी पत्नी सहारनपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष हैं. तीसरे स्थान पर यहां के विधायक और इस बार सपा के चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे माविया अली हैं.

 सोशल मिडिया पर तीन दिनों से एक मैसेज शेयर/पोस्ट किया जा रहा है कि देवबंद में 70 फीसदी मुस्लिम वोट हैं और फिर भी भाजपा का प्रत्याशी जीत गया है. इस पर कयास लगाए जा रहे हैं कि ऐसा सिर्फ दो हालात में हो सकता है. एक, या तो 50 प्रतिशत से ज्यादा मुसलमानों ने भाजपा को वोट दिया है या EVM मशीन में गड़बड़ की गयी है.

देवबंद के चुनावी नतीजे को लेकर दो तरह की बातें सामने आ रही हैं. एक पक्ष के कट्टरपंथियों ने इसका विस्तार किया है और उनका कहना है कि देवबंद में भी हम जीते जबकि यहां 80 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. और उन्होंने तंज़ ये किया है कि मुस्लिम महिलाएं अपने मर्दो को बिना बताये मोदी को वोट दे कर आयी हैं, क्योंकि वो तीन तलाक़ के मसले पर मोदी के साथ हैं. और दूसरी बात मुस्लिम समुदाय के पक्ष के माध्यम से सामने आ रही है कि यहां बिना बेईमानी किए भाजपा नहीं जीत सकती है.

देवबंद सीट पर 1952 से आज तक सिर्फ दो ही मुस्लिम विधायक बने हैं, वो भी 2016 के उपचुनाव में माविया अली और 1977 में जनता पार्टी से मोहम्मद उस्मान. देवबंद के बारे में यह जान लेना आवश्यक है कि यहां 70 या 80 फीसदी नहीं बल्कि 45 प्रतिशत के आसपास मुस्लिम हैं. यहां का मुस्लिम समुदाय स्वघोषित सेक्युलरो में बंट गया और हमेशा से बंटता आया भी है. देवबंद में इस बार हिन्दुओ की सभी जातियों और बिरादरियों एकजुट रूप से भाजपा को वोट दिया क्योंकि सपा और बसपा, दोनों ही के प्रत्याशी मुस्लिम थे.

बसपा के माजिद अली को 72,654 और सपा के माविया अली को 55,278 वोट मिले. दोनों के कुल वोट हुए 1,27,932. भाजपा के कुंवर बृजेश सिंह को 1,01,977 वोट मिले. हिन्दू वोटों और मुस्लिम वोटों के बीच के अंतर को देखकर साफ़ कहा जा सकता है कि मुस्लिम वोट में बंटवारा हुआ है या नहीं?

दरअसल देवबंद में मुसलमानों ने न तो भाजपा को वोट दिया है और न ही ईवीएम मशीन में किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना दिखती है. बल्कि हुआ यह है कि हिन्दू की छोटी और बड़ी सभी जातियों और दलितों और यादवों ने भी सपा-बसपा को किनारे करते हुए एकजुट होकर भाजपा को वोट दिया है, इसी कारण भाजपा की जीत हुई है.

गाड़ा युवा मंच के अध्यक्ष फरहाद गाड़ा स्थिति साफ़ करते हैं, ‘सपा और बसपा दोनों के प्रत्याशियों को किसी हिन्दू ने वोट नहीं दिया. माजिद अली को दलित वोटों का आधा हिस्सा ही मिला. सपा और बसपा के प्रत्याशियों को मिले वोटों को मिला दें तो लगभग सवा लाख वोट मिले, जिनमें एक लाख से ज्यादा मुस्लिम हैं. यह कहना गलत है कि मुस्लिमों ने भाजपा को वोट किया. एक बात यह भी है कि देवबंद ही नहीं पूरे सहारनपुर में मुसलमानों ने हिन्दू प्रत्याशी को वोट तो दिया – जैसे संजय गर्ग और नरेश सैनी विधायक बन गए, मगर हिन्दू समाज ने मुसलमान प्रत्याशी को बिलकुल वोट नहीं दिया. जैसे इमरान मसूद और नोमान मसूद भी हार गए. यह पूरी तरह से साम्प्रदायिक चुनाव था.’

वहीँ पैग़ाम-ए-इंसानियत के अध्यक्ष आसिफ राही ईवीएम में गड़बड़ी होने की वकालत करने लगते हैं. वे कहते हैं, ‘बसपा सुप्रीमो के आरोपो में दम है. किसी मुसलमान ने भाजपा को वोट नहीं दिया. ईवीएम में शत-प्रतिशत गड़बड़ है. सुब्रमण्यम स्वामी भी यह कह चुके हैं. इसकी तैयारी 6 महीने से की जा रही थी. पूरे चुनाव की जांच होनी चाहिए.’

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