बिहार के चुनाव में केजरी का दादरी-अस्त्र

अफ़रोज़ आलम साहिल, TwoCircles.net

बिहार की राजनीत में इन दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के एक रेडियो-संदेश की ज़बरदस्त हलचल है. दादरी की घटना की रौशनी में अरविन्द केजरीवाल का यह संदेश नफ़रत की राजनीत करने वाले नेताओं को एक सिरे से बेपर्दा करती है.


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इस संदेश के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. दादरी में जो कुछ भी हुआ, उसकी सियासी फ़सल बिहार के चुनाव में काटी जा सकती है, इसी अंदेशे को अरविन्द केजरीवाल ने खुद अपनी आवाज़ दी है. बिहार के जागरूक लोग भी इस अंदेशे से सहमत दिखाई दे रहे हैं.

पटना के प्रदीप कुमार बताते हैं कि –‘केजरीवाल के इस संदेश का चाहे मीडिया चाहे जितना विरोध करे, चाहे इसे जनता के पैसे का जितना दुरूपोग बताए, लेकिन यह संदेश देश में इंसानियत को बढ़ावा देने के लिए बेहद ही ज़रूरी था. ऐसा संदेश लोगों में ज़रूर जाना चाहिए.’ आगे प्रदीप हंसते हुए बताते हैं कि –‘हालांकि अब मीडिया का विरोध खत्म हो चुका है. अब उन्हें दिल्ली के जनता के पैसे का दुरूपयोग नहीं लगेगा, क्योंकि उसी जनता का पैसा अब उन्हें भी विज्ञापन के पैसे के रूप में मिलने जो लगा है.’

स्पष्ट रहे कि केजरीवाल ने इस संदेश को पहले रेडियो पर जारी किया था. जिसका बीजेपी नेताओं के साथ-साथ कई मीडिया ने भी विरोध किया था और इसको दिल्ली के जनता के पैसे का दुरूपयोग बताया था. लेकिन अब ये विज्ञापन न्यूज़ चैनलों पर भी आ गया है. उससे आगे अब वो बिहार में सोशल मीडिया खासतौर पर वाट्सअप पर वायरल हो चुका है.

पटना में ही मुस्लिम तरक़्क़ी मंच से जुड़े सफ़दर अली का कहना है कि –‘राजनीतिक साज़िशों के तहत जिस तरह से देश के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है, ऐसे घड़ी में केजरीवाल का यह संदेश लोगों को सही दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करता है. बल्कि ऐसा संदेश हमारे प्रधानमंत्री जी को भी जारी करना चाहिए.’

सफ़दर आगे बताते हैं कि –‘केजरीवाल के इस संदेश का इस चुनाव में बिहार की जनता पर इसका असर काफी पड़ेगा.’ पटना के महेन्द्र भी मानते हैं कि –‘केजरीवाल का संदेश काफी बेहतर हैं. ऐसे संदेशों को हर घर तक पहुंचाने की ज़रूरत है. बिहार चुनाव में भी इससे लोग ज़रूर प्रभावित होंगे और अपना वोट सोच-समझ कर देंगे.’

दरअसल, बिहार की राजनीत इन दिनों भारी ध्रुवीकरण के दौर से गुज़र रही है. इस ध्रुवीकरण के मायाजाल में तमाम साम्प्रदायिक सियासी ताक़तें लगी हुई हैं. दूसरी तरफ़ अरविन्द केजरीवाल और नीतिश कुमार का सियासी गठबंधन नफ़रत की राजनीत करने वाली सियासी ताक़तों के चेहरे से नक़ाब हटाने का दावा कर रही है. देखने वाली बात यह होगी कि बिहार की जनता इन दावों को किस हद तक स्वीकार करती है. केजरीवाल का यह दादरी अस्त्र बिहार के जनता पर कितना असर करता है…

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