‘ट्रिपल तलाक़ का ख़त्म होना एक इंक़लाबी फ़ैसला है’ —शाईस्ता अम्बर

फ़हमिना हुसैन, TwoCircles.net

लखनऊ : ‘ट्रिपल तलाक़ का ख़त्म होना एक इंक़लाबी फ़ैसला है. इसके लिए हमने काफ़ी संघर्ष किया है. बहुत लम्बी लड़ाई लड़ी है. अब इस फैसले ने औरतों को उनका हक़ दिया है. सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक फैसला है.’


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ये बातें ऑल इंडिया महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्षा शाईस्ता अम्बर की हैं. उन्होंने TwoCircles.net के साथ बातचीत में कहा कि, अक्सर उलेमाओं द्वारा ये कहा जाता है कि तीन तलाक़ का चलन अब मुस्लिम समाज में ना के बराबर है. ये बिल्कुल उसी तरह की सफ़ाई है, जैसे रेगिस्तान में शुतुरमुर्ग अपनी चोंच गाड़े हुए ये समझता है कि जैसे मानो उसे न कुछ सुनाई दे रहा है न कुछ दिखाई दे रहा हो. हमारे उलेमा सच्चाई को नहीं देख रहे हैं या देखना ही नहीं चाहते हैं.

ट्रिपल तलाक़ के ख़त्म होने से क्या मुस्लिम समाज में तलाक़ से मामले ख़त्म हो जायगें? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि, तलाक़ के मामले ख़त्म तो नहीं होंगे, लेकिन जब क़ानून बन जाएगा तो क़ानून के डंडे से डर लाज़िमी है.

हालांकि आगे उन्होंने कहा कि तलाक़ के मामले कम हों, इसके लिए सोच बदलनी होगी, क्योंकि ज़ेहनियत बदलनी ज़रूरी है.

उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि, हिंदू मैरिज एक्ट के तर्ज पर मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाना चाहिए, ताकि मुस्लिम महिलाओं की ज़िन्दगी के साथ किसी तरह खिलवाड़ न हो सके. अक्सर देखा गया है कि तलाक़ के बाद मामला फैमली कोर्ट में चलता रहता है और मर्द दूसरी शादी करके ऐश करता है.

आगे शाईस्ता अम्बर ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि केंद्र जो क़ानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया क़ानून संबंधी चिंताओं का ख़्याल रखा जाएगा.

बताते चलें कि शाईस्ता अम्बर मुस्लिम महिलाओं के हक़ के लिए सन् 2000 से ही लड़ाई लड़ रही हैं. इसके लिए उन्होंने मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना 2005 में की.

वो कहती हैं कि, अक्सर हक़ की बात करने वाले को बाग़ी कहा जाता है. जब उन्होंने मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना की थी, उस वक़्त हमें भी बाग़ी कहा गया. सोशल बायकाट तक किया गया, लेकिन आख़िर में जीत हक़ पर रहने वालों की हुई.

गौरतलब रहे कि तीन तलाक़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर मुहर लगा दी है. इस फ़ैसले के तहत तीन तलाक़ पर 6 महीने तक की रोक है. अगर केन्द्र सरकार अगले 6 महीने के भीतर क़ानून का ड्राफ्ट तैयार कर लेती है तो क़ानून बनने तक ये रोक जारी रहेगी, अन्यथा तीन तलाक़ को वैध माना जाएगा.

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