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‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मिल्लत की नुमाइंदगी मज़बूती से नहीं कर पा रहा है’

‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मिल्लत की नुमाइंदगी मज़बूती से नहीं कर पा रहा है’

TwoCircles.net News Desk

नई दिल्ली : दिल्ली के फ़तेहपूरी मस्जिद के नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद मुवज़्ज़म अहमद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बयान में नित नए बदलाव पर चिंता व्यक्त किया है.

मौलाना मुहम्मद मुवज़्ज़म अहमद का कहना है कि, ऐसा लगता है कि बोर्ड तीन तलाक़ के मसले पर कन्फ़्यूज़ है.

आगे उन्होंने कहा है कि, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में जिस तरह से एक के बाद एक कई अडिश्नल हलफ़नामे दाख़िल किए हैं, वो बोर्ड के कन्फ़्यूज़न को ज़ाहिर करता है.

मौलाना ने कहा है कि, अगर बोर्ड से सही रणनीति व समझदारी का प्रदर्शन किया होता तो आज इसकी नौबत ही नहीं आती और मामला इतना आगे नहीं जाता, बल्कि ये मामला पहले ही सुलझ गया होता.

उन्होंने कहा कि, बोर्ड को सोच समझ कर फ़ैसला लेना चाहिए और कोई भी फ़ैसला लेने से पहले तमाम मसलकों के उलेमा-ए-कराम से मश्विरा भी करना चाहिए था, लेकिन ऐसा अमल देखने में नहीं आया है.

मौलाना ने इस प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि, बोर्ड ने अदालत में जो हलफ़नामा पहले दिन दाख़िल किया था, अगर उसमें मुसलमानों में प्रचलित तमाम तरह के तलाक़ के तरीक़ों का ज़िक्र कर दिया गया होता तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट में स्टैंड ही नहीं करता, बल्कि विरोधियों के तमाम अर्ज़ियां ख़ारिज हो जातीं.

उन्होंने कहा कि, बोर्ड को चाहिए कि हर साल या छ महीने पर तमाम मसलकों के मानने वाले उलेमा का ‘नुमाइंदा इजलास’ बुलाए. सिर्फ़ बोर्ड से जुड़े अपने सदस्यों का बैठक बेमानी है, क्योंकि बोर्ड अपने सदस्यों का नहीं, बल्कि पूरी मिल्लत का मुनाइंदा है.