सचिन वालिया की मौत के बाद बदल गई है भीम आर्मी की कहानी

सचिन वालिया अपनी मौत से 2 दिन पहले

आस मोहम्मद कैफ, TwoCircles.net

सहारनपुर : सचिन वालिया की मौत के बाद के भीम आर्मी गहरे बदलाव की और है इसके लिए भीम आर्मी के पदाधिकारियो में खास बातचीत हुई है भीम आर्मी सचिन वालिया की मौत के बाद नए सिरे से रणनीति बना रही हैं इस मीटिंग में बनाई गई रणनीति के ताल्लुक से भीम आर्मी के लोग कुछ भी बताने से इंकार कर रहे है . मेरठ में बदला गैंग बना रहे सात दलित युवकों की गिरफ्तारी के बाद दलितो के नोजवानों में चुप्पी छा गई है हालाकि पुलिस ने सचिन वालिया की मौत का खुलासा कर दिया है मगर भीम आर्मी के लोग इससे संतुष्ट नही है .सचिन के भाई कमल वालिया के मुताबिक पुलिस की कहानी सही नही है .पुलिस का कहना है कि सचिन की मौत एक दुर्घटना है यह तमंचा चेक करते हुए हुई है मगर भीम आर्मी के लोग पुलिस की कहानी को सच नही मान रहे हैं.


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इस सबके बीच भीम आर्मी का व्यवहार बदल गया है इनके कार्यकर्ता अब मीडिया से बेहद विनम्रता से बात कर रहे हैं और पुलिस पर आक्रामक नही है.सचिन वालिया की मौत की गुत्थी उलझ गई है पुलिस ने खुलासा तो कर दिया है पुलिस के अनुसार सचिन वालिया पड़ोस के एक घर में था वहां वो तमंचा चेक कर रहे थे उसको गोली लगी वो गिर गया. जबकि सचिन वालिया के परिजनों का अब भी कहना है कि वो सुबह नाश्ता करने के लिए घर से बाहर गया था जहां रामनगर चौक पर उसको गोली मार दी गई . पुलिस और परिजन दोनों एक दूसरे की कहानी को शुरू से ही झूठा बता रहे थे .मगर सच यह है कि सचिन वालिया मर चुका है और सहारनपुर में भीम आर्मी की रीढ़ अब टूट चुकी है .

भीम आर्मी से जुड़े जानकारो के मुताबिक सचिन सिर्फ सहारनपुर के जिलाद्यक्ष कमल वालिया के भाई के तौर पर पहचान नही रखता था बल्कि भीम आर्मी का सबसे सक्रिय और महत्वपूर्ण कार्यकर्ता था वो भीम आर्मी का फाइनेंशियल कंट्रोलर का कामकाज देखता था.भीम आर्मी पिछले दो प्रदर्शनों में भारी भीड़ सचिन के मैनजेमेंट की ही देन थी. आठ माह में जेल से लौटे अपने भाई कमल वालिया की जगह उसके कामकाज को देखते हुए सचिन ने भीम आर्मी को जनपद और अधिक मजबूती दी थी सचिन ने अपने भाई की कमी भीम आर्मी को महसूस नही होने दी .

सचिन का घर और उदास बैठी मां कांति

कमल वालिया भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर रावण के बाद भीम आर्मी में सबसे ज्यादा भीड़ जुटाने के लिए जाने जाते है और वो चन्द्रशेखर के सबसे विश्वसनीय साथी भी है . कमल वालिया का घर सहारनपुर से बिल्कुल सटे गांव रामनगर में है यह बड़गांव मार्ग पर है शब्बीरपुर जाने के लिए यहां से ही गुजरना पड़ता है . भीम आर्मी के तमाम प्रदर्शनों और आयोजनों में सचिन वालिया सबसे आगे रहा है पिछले साल 9 मई को जब सहारनपुर में भारी बवाल हुआ तो सबसे अधिक हिंसा रामनगर में हुई थी और एसपी सिटी को बचाकर भागना पड़ा था तब भीम आर्मी के अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं में सचिन भी था . यहीं से 100 मीटर दूर एक महाराणा प्रताप भवन है तब इसमें आग लगा दी गई थी.उसके बाद से ही राजपूतों की आंख में रामनगर के कई लड़के खटक रहे है जिनमें सचिन भी एक था .

पिछले दिनों जब इस महाराणा प्रताप भवन में राजपूतो ने जयंती मनाने की अनुमति मांगी तो रामनगर के दलितों ने इसका विरोध किया.रामनगर एक दलित बहुल इलाका है और यह भवन एकदम गांव के करीब है यहां राजपूतो के आवागमन से दलित और राजपूतों में संघर्ष की संभावना थी इसमें आग में घी डालने का काम उपदेश राणा नाम के एक विवादित युवक की वीडियो ने किया जिसमें भीम आर्मी को ठोंकने की बात कही गई थी .पहले तो स्थानीय प्रशासन ने इस बात की गंभीरता को ताड़ लिया और अनुमति नही दी मगर बाद में देवबंद विधायक बृजेश सिंह के कहने पर अनुमति दे दी गई . इसके बाद 200 लोगो को जयंती मनाने की अनुमति दे दी गई और इसमें 800 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई .

नाम ना छापने की शर्त पर रामनगर का एक युवक हमे बताता है कि इसके बाद दलित नोजवानों में अत्यधिक तनाव था इस दिन दलितो ने काम पर जाना मुनासिब नही समझा उन्हें डर था कि कहीं शब्बीरपुर की तरह राजपूत भीड़ गांव पर हमला न कर दे इसलिए ज्यादातर युवा अपने घरों की छत पर खड़े थे और राजपूतों पर नजर रख रहे थे सचिन भी इनमे से एक था अचानक से गोली की आवाज़ आई और सचिन गिर गया अब जाहिर है अगर सभा की अनुमति न दी जाती तो यह घटना टल सकती थी इसलिए दलितो का सारा गुस्सा प्रशासन पर है .सचिन वालिया की मां कांति देवी (53) कहती है ” यही तो चाहते थे ये हो गया प्रशासन को परमिशन नही देनी चाहिए थी” .

सचिन की यह मौत भीम आर्मी के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना साबित होने वाली है इसका संकेत मिलने लगा है.शुक्रवार को गांव के अम्बेडकर भवन में सचिन के तीजे की श्रंद्धाजलि सभा में भी मिले थे. भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर रावण और राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह को इसमें शामिल होने की अनुमति नही दी गई भीम आर्मी के लोग चाहते थे इस दिन कोई भाषण न दिया जाए मगर सभा मे मौजूद लोगों ने कमल वालिया को बोलने के लिए खड़ा कर दिया .कमल वालिया ने अपने भाई को समाज के लिए हुआ शहीद बताया और समाज के युवाओ को शहीद उधम सिंह से प्रेरणा लेने को कहा ,कमल ने कहा उन्हें सरकार से इंसाफ की कोई उम्मीद नही है पुलिस हत्या की कहानी को डाइवर्ट कर रही . इसके बाद कमल ने 27 मई को दलित स्वाभिमान के लिए बड़े स्तर पर इकट्ठा होने का ऐलान भी कर दिया .भावना में बह गए कमल ने कहा कि कुछ लोग उनके भाई की मौत पर जश्न मना रहे हैं सोशल मीडिया पर हमारी मज़ाक उड़ा रहे है वो लकीर खींच ले हमे पीछे नही हटेंगे .

कमल वालिया के घर के बाहर वाली गली

जब कमल यह कह रहे थे तो उनके कुछ साथियों ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की मगर वो बोलते रहे उन्होंने खुले तौर पर दलितो से क्रांति के लिए तैयार रहने को कहा .पुलिस ने उनके पूरे भाषण की रिकॉर्डिंग भी की थी .भीम आर्मी की अप्रत्याशित चुप्पी समझ मे नही आ रही है . जिस समय सहारनपुर में यह सभा हो रही थी उसी समय मेरठ पुलिस ने 7 दलित नोजवानो को गिरफ्तार किया था इनपर आरोप था कि यह सचिन वालिया की मौत का बदला लेने के लिए गैंग बना रहे थे ये सभी सात युवक मेरठ के अलग -अलग इलाको में है इनमे से एक रविन्द्र अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी है इन सभी पर हत्या का षड्यंत्र रचना का आरोप लगाया गया है .पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी को एक बड़ी कामयाबी बताया .पुलिस के अनुसार इनके निशाने पर देवबंद का विधायक बृजेश सिंह और फूलन देवी का हत्यारा शेर सिंह राणा था . गिरफ्तार युवको पर व्हाट्सप पर ग्रुप बनाकर हिंसा करने के लिए प्रेरित करने का आरोप है मेरठ के एडीजीपी प्रशान्त कुमार के अनुसार गिरफ्तार युवक रवि गौतम ब्रह्मपुरी ,नीरज मोदीपुरम, संदीप हस्तिनापुर, राहुल नीवा सहारनपुर में जाकर खूनखराबा करना चाहते थे .पुलिस के इस खुलासे पर भीम आर्मी ने अभी कोई प्रतिक्रिया नही दी है .इस बार भीम आर्मी अप्रत्याशित रूप से शांत है.

भीम आर्मी के प्रवक्ता मंजीत नॉटियाल ने इसपर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है उनका समय सब जवाब देगा अभी भीम आर्मी पूरी तरह सदमे में है।

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