सुपुर्द ख़ाक किये गए हज़रत इफ़्तेख़ारलहसन कांधलवी

आस मुहम्मद कैफ, TwoCircles.net

कांधला-

बुजुर्गानेदीन आलिम’ए’कौम हजरत मौलाना इफ्तेखारउल हसन कांधलवी को आज सुबह कांधला में ही दफन कर दिया गया।देर शाम दिल्ली के एक अस्पताल बीमारी से जूझते हुए उनका इंतेक़ाल हो गया था।वो 95 साल के थे।उनके जनाज़े में हजारों लोग पहुंचे।जिनमें हिंदुस्तान की कई बड़ी मजहबी शख्सियत शामिल रही।


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मौलाना इफ़्तेख़ार कांधला कस्बे में ही रहते थे उन्होंने इस्लामिक शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए बहुत काम किया।दर्जनों किताबें लिखी और कौमी एकता का सन्देश दिया।

उनके इंतेक़ाल की खबर के साथ बड़ी संख्या में दोनों समुदाय के लोग उनके घर पहुंच गए , कांधले के बाज़ार पूरी तरह बंद हो गए।जो समाज उनके रुतबे को बताने के लिए काफी था।आज उनकी नमाज़े जनाजा में ट्रैफिक की व्यवस्था के लिए खुद एसपी शामली को कमान संभालनी पड़ी।कांधला के अमित जैन ने बताया कि यह सम्पूर्ण कांधला की क्षति है वो इस कस्बे के साये की तरह थे उन्होंने यहां कभी साम्प्रदयिकता को पैर नही पसारने दिया।

मौलाना इफ़्तेख़ारलहसन तबलीग़ ए जमात के संस्थापक मौलाना इलियास के भाई थे।हाल ही में तबलीग़ के जिम्मेदार मौलाना शाद और दारुल उलूम के बीच हुए विवाद में उन्होंने ही समझौता कराया था।
तमाम बड़ी राजनीतिक और सामाजिक हस्ती आज उनको खिराजे एकीदत पेश करने पहुंची।

मौलाना ‘कांधले वाले हजरत जी के नाम से मशहूर थे अक्सर जब लोग उनसे मिलने जाते थे तो वो कहते थे “जिन्हें अपने मुल्क से मुहब्बत न हो उनके ईमान पर भी भरोसा नही किया जा सकता हमें बहकावे में न आकर अमन चैन के साथ रहने चाहिए”।उनके प्रयासों ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में कांधले को आग में जलने से बचाए रखा।

मौलाना के पड़ोसी शाहिद मंसूरी के मुताबिक हजरत के पास बड़ी संख्या में गैर मुस्लिम भाइयों का आना जाना था वो यहां दुआ के लिए पहुंचते थे।मौलाना हजरत ने 35 साल तक अध्ययन करके क़ुरआन ‘ए ‘पाक का अनुवाद भी किया।

हजरत की पैदाइश 1922 में हुई थी।उनके वालिद का नाम रैफुल हसन था।पश्चिमी उत्तर प्रदेश उनकी पहचान एक ऐसे विद्वान की थी जिनकी लोकप्रियता बहुसंख्यक समाज मे सबसे ज्यादा थी।अक्सर यहां सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव,दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग,पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव,

रालोद सुप्रीमो अजित सिंह और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद अक्सर यहां आते थे।

हज़रत के चार  बेटियां और तीन बेटे है।उनके बेटे मौलाना नुरुल हसन,राशिद और मौलाना बदर हसन कस्बे में ही रहते हैं।2013 के दंगे में हज़रत के यहां हजारों दंगा पीड़ितों ने शरण ली थी।जिसके बाद उन्होंने दुनिया भर के लोगो से पीड़ितों की मदद करने की अपील की।

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