15 साल के फुरकान ने सुमित को बचाने के लिए कुर्बान कर दी जान

स्टाफ रिपोर्टर।Twocircles.net

रामपुर के एक 15 साल के नौजवान फुरकान ने दो युवकों को डूबने से बचाते हुए अपनी जान गंवा दी। कमाल यह कि फुरकान ने बादल को बचाने के बाद भी सुमित को बचाने का पूरा प्रयास रिस्क होने के बावजूद जारी रखा मगर उसके बाद फुरकान की तमाम कोशिशें के बाद भी उसने डूबने वाले दो युवकों में से एक को तो बचा लिया मगर दूसरे युवक को बचाने की जद्दोजहद में वो खुद डूब गया।


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यह मामला मामला रामपुर के स्वार टांडा क्षेत्र में शुक्रवार का हैं। दढ़ियाल क्षेत्र के ग्राम पर्वतपुर के रहने वाले संजीव कुमार का 13 वर्षीय पुत्र सुमित और रामचंद्र का 14 वर्षीय पुत्र बादल दोनों दोस्त थे। बीते शुक्रवार को दोपहर के समय दोनों दोस्त अकबराबाद क्षेत्र के नया गांव के सामने बह रहीं कोसी नदी में नहाने गए थे। कोसी नदी में नहाने के दौरान दोनों सुमित और बादल गहराई में पहुंच गए और पानी अधिक होने के कारण डूबने लगें।

फुरकान

तभी नदी के पास खेत में मौजूद 15 वर्षीय फुरकान को सुमित और बादल डूबते हुए दिखाईं दिए। फुरकान ने दोनों अनजान लड़के सुमित और बादल को बचाने के लिए बिना कुछ सोचे समझे नदी में छलांग लगा दी।‌ फुरकान ने पानी में डूब रहें बादल को सकुशल बाहर निकाला, इसके बाद वो सुमित को बचाने के लिए फिर से नदी में कूद गया और सुमित को बाहर निकालने की कोशिश करने लगा लेकिन पानी के तेज बहाव के चलते फुरकान सुमित को बाहर नहीं निकाल पाया और फुरकान ख़ुद भी गहरे पानी में चला गया और डूब गया।

नदी के आसपास खेतों पर काम कर रहे लोगों की सूचना पर पुलिस ने गोताखोरों की मदद से फुरकान और सुमित को बाहर निकाला लेकिन तब तक दोनों की सांसें जवाब दे चुकीं थीं। फुरकान द्वारा डूबने से बचाए गए बादल को इलाज़ के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

15 वर्षीय फुरकान स्वार के गांव गागन नगली के किसान अफसर अली का पुत्र था, फुरकान अकबराबाद अपने मामा के यहां घूमने आया हुआ था।‌ जब हादसा हुआ तो फुरकान नदी किनारे खेतों के पास घूम रहा था। फुरकान अपनी हिम्मत के बल पर बादल को सकुशल नदी से बाहर भी ले आया लेकिन कुदरत को शायद कुछ और ही मंजूर था, सुमित को बचाने के लिए दोबारा कोसी नदी में कूदा फुरकान भी नदी की गहराई में समा गया और सुमित को बचाने के फेर में अपनी भी जिंदगी गंवा दी।

फुरकान अपने घर में सबसे छोटा था।‌ फुरकान दिल्ली में रहकर फ़ोटो बनाने का काम करता था। फुरकान के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वो अपने घर में सबके लिए ज़िगर का टुकड़ा था। परिजन फुरकान को याद करते हुए कह रहे हैं , ” अब अपने ज़िगर के टुकड़े को कहां से लाएं”।

सुमित

इस घटना में एक अन्य मृतक सुमित के पिता संजीव कुमार का भी रो-रोकर बुरा हाल है।‌ 13 वर्षीय सुमित अपने घर का इकलौता लड़का था। गांव के ही स्कूल में कक्षा आठ में पढ़ता था। मृतक सुमित के पिता संजीव फुरकान का एहसान मानते हैं। वे कहते हैं कि , ‘ फुरकान ने उनके बेटे को बचाने के लिए अपनी जान गंवा दी है, किसी अनजान शख़्स के लिए इतना कौन करता है’। पेशे से मजदूर संजीव मृतक फुरकान के परिजनों को सांत्वना देने उनके घर भी गए।

बहादुरी और हिम्मत उम्र से नहीं आती, ये बात 15 वर्षीय फुरकान ने साबित कर दी है। अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना फुरकान ने नदी में डूब रहे दो अंजान किशोरों बादल और सुमित को बचाने के लिए कोसी नदी में छलांग लगा दी। फुरकान ने सुमित और बादल से कोई पहचान और रिश्तेदारी न होने के बावजूद दोनों को बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी।

सुमित और फुरकान की मृत्यु के बाद पूरे क्षेत्र में शोक व्याप्त है। आस-पास के गांवों में भी फुरक़ान की हिम्मत को लेकर भी चर्चाएँ चल रही है। गांव के लोग भी आपस में चर्चा करते हुए कह रहे हैं कि, “फुरक़ान ने एक बहुत बड़ी इंसानियत दिखाई है और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म होता है”।

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