सहारनपुर : डीजीपी सुलखान सिंह ने सर्किट हाऊस में लिया जायज़ा, घटनास्थल पर नहीं गए दोनों उच्च अधिकारी

आस मोहम्मद कैफ़, TwoCircles.net

सहारनपुर : उत्तर प्रदेश में सहारनपुर ज़िले के शिमलाना व उसके आस-पास के गांव में शुक्रवार को हुए जातीय संघर्ष के बाद रविवार को पिछले 15 दिनों में दो बार हुए हिंसा के कारणों को समझने और सहारनपुर की परिस्थितियों की समीक्षा करने की ख़ातिर उत्तर प्रदेश के नए डीजीपी सुलखान सिंह व प्रमुख गृह सचिव देवाशीष पाण्डा सहारनपुर पहुंचे.

सहारनपुर के सर्किट हाऊस में ही बैठकर सहारनपुर की पूरे परिस्थितियों का जायज़ा लिया और पिछले 15 दिनों में दो बार हिंसा के कारणों को भी अच्छी तरह से समझ लिया.

इस कार्य में उन्हें पूरे तीन घन्टे लगें. इस दौरान उन्होंने मंडल स्तर व तीनों ज़िलों के आला अधिकारियों के अलावा तमाम राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मंडल से वार्ता कर जानकारी हासिल की. हालांकि ये बात अलग है कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मंडल के नाम पर सिर्फ़ वहां भाजपा व बसपा के लोग ही थे. बाक़ी किसी दूसरी पार्टियों का कोई नेता नज़र नहीं आया.

तीन घंटे चले इस मीटिंग के बाद डीजी सुलखान सिंह व प्रमुख सचिव देबाशीष पाण्डया ने पत्रकारों से प्रेस-वार्ता की और स्पष्ट रूप से कहा कि इन कारणों की जांच की जा रही है कि बार-बार क्यों माहौल ख़राब हो रहा है.

इस पूरे प्रेस-वार्ता के दौरान उन्होंने पत्रकारों के कई सवाल दोनों उच्चाधिकारी या तो टाल गये या फिर घुमाकर जवाब दिया.

पत्रकारों ने पूछा था कि आप घटनास्थल पर क्यों नहीं गये? पत्रकारों पर दोनों घटनाओं में हमले हुए, तो पत्रकारों की सुरक्षा किसके ज़िम्मे है? दलितों द्वारा पलायन किया जा रहा है? पुलिस के सामने उपद्रवियों ने उत्पात मचाया?

ये कुछ ऐसे सवाल रहे जिनके सीधे जवाब इन दोनों उच्चाधिकारियों से ओर से नहीं दिया गया. बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी पुलिस कप्तान सुभाष दूबे ने ली और पुलिस के समक्ष उत्पात को प्रमुख गृह सचिव नकार गए.

वहीं पलायन के मामले में उन्होंने कहा कि कोई पलायन नहीं हो रहा है, बल्कि जिनकी नामजदगी अथवा संलिप्तता रही है वे खुद ही घर छोड़कर  छिपने के प्रयास में भाग गए हैं.

डीजीपी सुलखान सिंह ने स्पष्ट किया कि शासन की नीति सबको बराबरी की नज़र से देखना और किसी वर्ग अथवा जाति को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि क़ानून का राज स्थापित करना है.

बताते चलें कि इस प्रेस-वार्ता में प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि ज़िलाधिकारी व एसएसपी की ज़िम्मेदारी है कि वह प्रत्येक मामले पर गंभीरता से जांच कर दोषियों पर कार्यवाही सुनिश्चित करें. साथ ही उन्होंने मंडल के तीनों ज़िलों के अधिकारियों को अधिक सतर्कता बरतने की चेतावनी भी दी कि इस प्रकार की किसी घटना की पुनरावृत्ति न होने पाए.

डीजीपी सुलखान सिंह ने कहा कि जाति धर्म अथवा अन्य किसी प्रकार के भेदभाव की कोई गुंजाईश नहीं है. इसलिए पुलिस निष्पक्ष होकर क़ानून का राज क़ायम रखे.

उन्होंने कहा कि आपसी सौहार्द न बिगड़ने पाए, इसके लिये थाना स्तर पर क्षेत्र के सभी ज़िम्मेदार लोगों व मीडिया के लोगों को साथ लेकर समन्वय के प्रयास किये जाएंगे. इसके अलावा ग्राम चौकीदारों की भी मदद ली जाएगी ताकि सही इनपुट मिल सके.

प्रमुख गृह सचिव ने कहा कि उपद्रवियों की शिनाख्त के आधार पर सख़्त कार्यवाही होगी तथा कोई भी दोषी किसी भी रूप में बख़्शा नहीं जाएगा.

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