‘अत्याचारी’ पुलिस के कारण बिजनौर के पेदा गांव से मुसलमानों का पलायन

आस मुहम्मद कैफ़, TwoCircles.net

बिजनौर : यूपी के बिजनौर ज़िले का पेदा गांव फिर से ख़बरों में है. यहां के मुसलमानों ने पुलिसिया अत्याचार की वजह से पलायन का ऐलान कर दिया है. 6 परिवार घर छोड़कर जा भी चुके हैं.

मुसलमानों के पलायन के गवाह इस गांव के दीवार भी हैं. लोगों ने अपने घरों पर लिखवा दिया है कि इस गांव के मुसलमान पुलिस के उत्पीड़न से त्रस्त होकर गांव छोड़ रहे हैं.

गांव से पलायन करने वालों में सईद, इक़बाल, अनीस, नासिर आदि अपने परिवारों के साथ गांव छोड़कर चले गए हैं. इस प्रकार यहां से पलायन करने वाले परिवारों की संख्या 6 है.

वहीं मुख्तार, असग़र, सईदा, खुर्शीदा ने भी अपने घर पर ‘मकान बिकाऊ है’ का बोर्ड लगा दिया है.

मुख्तार कहते हैं, जहां इंसाफ़ न मिले वहां रहने का क्या फ़ायदा? पुलिस क़ातिलों के साथ खड़ी है. उनके लिए पैरवी करती है. हम पर झूठा मुक़दमा लिख दिया है. आगे भी लिख सकती है. किस पुलिस पर भरोसा करें, जब पुलिस खुद ही यह कह रही है कि, ‘अब पुराना वाला माहौल नहीं है.’

दरअसल, पेदा बिजनौर से नजीबाबाद मार्ग पर दो किलोमीटर की दुरी पर एक गांव है. पिछले साल सितम्बर महीने में इसी गांव में एक मुस्लिम बच्ची के साथ छेड़छाड़ की गई. विरोध के नतीजे में एक ही मुस्लिम परिवार से चार लोगों की मौत हुई, आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हुए. इस मामले में गिरफ्‍तार कई लोगों के साथ मौसम चौधरी भी है, जिसकी पत्नी इस समय बिजनौर की विधायक हैं.

उसके बाद यूपी चुनाव से ठीक पहले फ़रवरी महीने में इस मामले के आरोपी समुदाय के विशाल नाम के युवक का मर्डर हो गया. इस मर्डर का आरोप मुसलमानों के सर गया. इस मामले में 8 लोगों की नामज़दगी की गई और ये सभी पेदा कांड के वादी अथवा गवाह हैं.

हालांकि जानकारों के मुताबिक़ विशाल की हत्या अवैध संबंधों में बाधक बनने पर हुई, लेकिन चुनावी मौसम में इसका राजनीतिक मतलब निकाल लिया गया.

पेदा गांव के असग़र अली कहते हैं, विशाल के मर्डर के बाद स्थानीय विधायक और पेदा कांड के मुख्य आरोपी की पत्नी सूचि चौधरी की गाड़ी का चालक और एक अन्य की रहस्मय हत्या भी हुई, मगर वो दबा दी गई. शायद वो विशाल मर्डर के बारे में कुछ जानते हों.

इस मामले की जांच कोतवाल ऋषिराम कठेरिया कर रहे थे. वो पेदा कांड के समय बिजनौर में कोतवाल थे, लेकिन इस कांड के बाद उन्हें अमरोहा ट्रांसफ़र कर दिया गया. लेकिन विशाल मर्डर के जांच के लिए उन्हें अमरोहा से बुलाया गया. जब कठेरिया इस मामले के खुलासे की ओर थे, तभी ये मामला उनके हाथ से छीनकर सीबीसीआईडी को दे दिया गया. अब सीबीसीआईडी ने नामज़द सभी 8 मुसलमानों को दोषी बताया है.

पुलिस की 5 दिन में दस दबिश

सीबीसीआईडी की जांच में आरोपी बनाए जाने पर पुलिस ने पेदा गांव में ताबड़तोड़ दबिश लगा रही है. हालांकि जानकारों के मुताबिक़ आमतौर पर ऐसे मामलों में आरोपी अदालत की शरण में चला जाता है और पुलिस भी दबिश से परहेज़ करती है.

मगर 65 साल की अज़ीज़न का कहना है, ‘एक लंबे से चश्मे लगाए दारोगा कह रहा था कि अब पुराना वाला माहौल मत समझना, सरकार बदल गई है.’

पुलिस ने लगभग 5 दिन में 10 दबिश दी है. पूर्व प्रधान सईद इक़बाल और मौजूदा प्रधान कारी अनीस दोनों के घर पुलिस ने तोड़फोड़ भी की है. ख़ास बात यह है कि प्रधानी के चुनाव में अनीस ने सईद को ही हराया था. अब दोनों एक ही मुक़दमे में नामज़द हैं. दोनों ही पैदा कांड के चश्मदीद गवाह हैं. इसलिए दोनों प्राइम टारगेट हैं.

फ़ैसले के लिए दबाव बना रही है पुलिस

पेदा गांव में 200 मीटर अंदर घुसने पर क़ब्रिस्तान है. यहां अक्सर लोग इकठ्ठा रहते हैं और ताश खेलते हैं. असग़र और नासिर बताते हैं कि, बुधवार को शाम के वक़्त नए कोतवाल साहब आये और कहने लगे कि सुनो फ़ैसला कर लो वरना.

गांव में मौजूद लोगों के मुताबिक़ पुलिस वाले दबाव बनाने के लिए पीड़ितों के 3 बाईक भी उठा कर ले गएं.

अज़ीज़न बताती हैं, मेरी बेटी की उम्र की महिला सिपाही ने मेरे दो थप्पड़ मारे. यह कैसा इंसाफ़ है? क़ातिल को सज़ा तो मिलनी ही चाहिए.

खुर्शीदा को महिला सिपाही ने बाईक की चाभी न देने पर महिला सिपाही ने पिटाई की. मुक़दमें में नामज़द आठों मर्द हैं, मगर पुलिस 10 से ज्यादा महिला कांस्टेबल को साथ लाती है और गांव की महिलाओं के साथ मारपीट करती है.

सीसीटीवी कैमरा हटवाना चाहती है पुलिस

पेदा कांड के बाद पीड़ितों ने अपनी सुरक्षा के लिए अपनी गली के बाहर एक बड़ा लोहा का गेट और सीसीटीवी कैमरा लगवा लिया है.

मृतक की चाची सईदा के मुताबिक़ पुलिस कैमरा उतारने के लिये कहकर गई है. हमसे पूछती है, इसकी स्क्रीन किस घर में लगी है? हमने यह क्यों लगाया है? हमने इसकी परमिशन कहां से ली है?

कोतवाल की है साम्प्रदायिक छवि

बिजनौर शहर कोतवाली के नए प्रभारी गांव वालो की आंख में खटक रहे हैं. वो कहते हैं कि वो हमें लगातार डरा धमकाकर मौसम चौधरी से फैसला करने को कह रहे हैं.

नए कोतवाल प्रेमवीर सिंह राणा सहारनपुर से आए हैं. ये सहारनपुर में भी बहुत विवादित रहे हैं. कुतुबशेर थाने में मुस्लिमों पर आपत्तिजनक टिप्पणा और रामपुर मनिहारन में जूते लेकर मस्जिद में घुस जाना, उनका अतीत मुस्लिम विरोध का रहा है. यही नहीं, रामपुर मनिहारान में एक मुस्लिम युवक को उन्होंने सीधे गोली मार दी थी, जिसके बाद वहां बवाल हो गया और इन्हें निलंबित किया गया.

गांव वाले बताते हैं कि, कोतवाल हत्यारों के पक्ष में बयान दिलवाना चाहते हैं. और इसके लिए सबसे अधिक प्रताड़ित भी यही कर रहे हैं. अक्सर धर्म को आधार बनाकर लोगों को उल्टा-सीधा बोलते हैं.

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