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यूपी में शहीद पुलिसकर्मी की डीपी लगाने पर मुस्लिम युवक की ‘निराधार’ गिरफ़्तारी

यूपी में शहीद पुलिसकर्मी की डीपी लगाने पर मुस्लिम युवक की ‘निराधार’ गिरफ़्तारी

TwoCircles.net News Desk

मुज़फ़्फ़रनगर : उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक युवक को शहीद पुलिसकर्मी की डीपी लगाने के आरोप में धारा-420 के तहत गिरफ़्तार किया गया है.

उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में ज़ाकिर अली त्यागी को पुलिस ने एक शहीद पुलिसकर्मी की प्रोफ़ाइल तस्वीर लगाने के आरोप में धारा-420 के तहत गिरफ़्तार कर जेल भेजा है.

मुज़फ्फ़रनगर कोतवाली थाने के एसएचओ के मुताबिक़ अभियुक्त के ख़िलाफ़ कोई शिकायत नहीं मिली थी. पुलिस ने स्वतः उसकी फ़ेसबुक गतिविधियों का संज्ञान लेकर गिरफ्‍तार किया.

वरिष्ठ साइबर लॉ विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने ज़ाकिर अली त्यागी की गिरफ्तारी को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि आईटी एटक की धारा 66A अब क़ानून की किताब में है ही नहीं. इसके तहत किसी को गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता है.

दुग्गल के मुताबिक़ इस मामले में धारा-420 भी नहीं लगती, क्योंकि धोखाधड़ी के लिए किसी के साथ दोखा किया जाना ज़रूरी है. इस मामले में कोई पीड़ित भी नहीं है.

दुग्गल का कहना है कि ये आइंडेंटिटी थेफ़्ट का मामला हो सकता है लेकिन उसमें भी शिकायतकर्ता का होना ज़रूरी है.

ज़ाकिर अली त्यागी फेसबुक पर काफी सक्रिय थे और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर फ़ेसबुक पर टिप्पणियां किया करते थे.

पुलिस का कहना है कि किसी शहीद पुलिसकर्मी की प्रोफ़ाइल पिक्चर लगाना धोखाधड़ी है.

पुलिस ने ज़ाकिर अली त्याकी पर आईटी एक्ट की धारा 66A के तहत कार्रवाई भी की है. वहीं ज़ाकिर की गिरफ़्तारी पर अल्पसंख्यक समुदाय के युवकों में रोष है.

फ़ेसबुक पर #IStandWithZakirAliTyagi चलाया जा रहा है जिसके तहत युवा टिप्पणियां कर रहे हैं. कई युवाओं का कहना है कि ज़ाकिर त्यागी को सिर्फ़ अल्पसंख्यक होने की वजह से निशाना बनाया गया है.

एक युवा ने टिप्पणी की, “यदि किसी और की तस्वीर को प्रोफ़ाइल पिक्चर की तरह इस्तेमाल करना धोखाधड़ी है तो फिर उन हज़ारों युवाओं को गिरफ़्तार क्यों नहीं किया जा रहा जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर प्रोफ़ाइल पिक्चर में लगाकर विवादित टिप्पणियां कर रहे हैं.”

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद कई युवाओं को सोशल मीडिया पर गतिविधियों को कारण गिरफ़्तार किया जा चुका है.

गिरफ़्तार किए गए युवाओं में से अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय से हैं.