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दारुल उलूम देवबंद ने लगाई तबलीगी जमात के कार्यक्रमों पर रोक

दारुल उलूम देवबंद ने लगाई तबलीगी जमात के कार्यक्रमों पर रोक

आस मोहम्मद कैफ, TwoCircles.net

देवबंद : मज़हबी तालीम की कैपिटल कहे जाने वाले दारुल उलूम देवबंद ने अपने यहाँ तबलीगी जमात की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने की घोषणा की है.

संस्था के भीतर अब तबलीग़ की कोई गतिविधि नही होगी और न ही इस ताल्लुक से कोई बात की जायेगी.

आपको याद होगा एक बार दारुल उलूम ने तबलीग़ के जिम्मेदार मौलाना शाद  के खिलाफ एक फतवा भी जारी कर दिया था.  बाद में आपस में काफ़ी खतों किताबत का दौर चला. दारुल उलूम के कहने  के बाद भी मौलाना शाद ने माफ़ी नही मांगी थी.  बात बहुत बढ़ने पर हजरत कंधालवी को इसमें दखल देनी पड़ा था.

इस बार का विवाद तबलीग़ जमात का अंदरूनी है मगर दारुल उलूम इसकी गंभीरता को समझ कर खुद को इससे अलग रखना चाहता है.  दारुल उलूम के आलिमो खास बैठक बुलाकर इस बात कर फैसला लिया गया और  ऐलान किया गया कि दारुल उलूम, देवबंद में तबलीगी जमात का कोई कार्यक्रम नहीं होगा.

तबलीगी जमात में क्या विवाद है :

दरअसल सुन्नी मुसलमानो की सबसे बड़ी जमात तब्लीगी जमात के मरकज़ का केंद्र निजामुदीन दिल्ली में है. यहाँ से पूरी दुनिया के लिए जमात निकलती है. तीन साल से जमात के  मुख्य जिम्मेदार मौलाना जुबैर साहब के इंतेक़ाल के बाद जमात का अमीर बनने के लेकर संघर्ष चल रहा है.  कई बार आपस में मारपीट भी हो चुकी है.  मौलाना जुबैर के बेटे  मौलाना जुहैर और मौलाना शाद दोनों ही अमीर बनना चाहते है. जिम्मेदारों में वर्चस्व की लड़ाई के चलते तबलीग़ के कामकाज भी प्रभावित हो रहा है. कई बार कारकुन भी आपस में भिड़ चुके हैं. दारुल उलूम के बहुत सारे तलबा और उस्ताद भी तबलीग़ से जुड़े है.

दारुल उलूम देवबंद का फैसला :

कल हुई एक अहम् मीटिंग में दारुल उलूम ने बेहद सख्त फैसला लिया है. जारी आदेश में कहा गया है कि अगर कोई तलबा तबलीग़ की एक्टिविटी में लिप्त पाया गया तो उसे सस्पेंड कर दिया जायेगा.  दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल क़ासिम बनारसी की सदारत में यह फैसला हुआ.  उन्होंने एक चिठ्ठी जारी की है जिसमे कहा गया है दारुल उलूम देवबंद तबलीग़ जमात के विवाद में नही पड़ना चाहता. उसका इससे कोई लेना देना नही है. जब तक दोनों गुटों में मसले का हल नही निकल जाता दारुल उलूम खुद को इससे दूर रखेगा.  जमीयत उलेमा हिन्द के सदर मौलाना अरशद मदनी ने भी दारुल उलूम के इस फैसले की हिमायत की है उन्होंने कहा कि यह फैसला तब्लीगी जमात के खिलाफ नही है बल्कि संस्था के छात्रों को झगड़ा से बचाने के लिए है. दोनों पक्षो में सुलह की कोशिश भी की गयी जोकि नाकाम रही. जमात में बढ़ी गुटबाजी से पूरी दुनिया में जमात के कामकाज पर गहरा असर पड़ा है.