तो नोटबंदी को भी भुनाने में जुट गई है बीजेपी!

TwoCircles.net Staff Reporter

कोई सोच भी नहीं सकता था कि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के वास्ते इतनी जल्दी वहां की आधी से अधिक आबादी इसके पक्ष में राय देगी. हालांकि यह मन बनाने के लिए सोशल मीडिया पर 51 हज़ार से अधिक ग्रुप व मैसेज़ बनाए गए थे और उन्हें यूरोपीय संघ से अलग होने के फ़ायदे को समझाया गया था. अब ठीक इसी तर्ज पर यूपी चुनाव में भाजपा भी जुट गई है. यहां भी हज़ारों की संख्या में वाट्सऐप ग्रुप इत्यादि बनाए गए हैं और अलगअलग तबक़े के लिए अलगअलग तरह मैसेज तैयार किए गए हैं.’


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ये बातें आज जामिया क्लेक्टिव द्वारा जामिया नगर के सैय्यदैन मंज़िल में गुफ़्तगू नामक आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राज्यसभा टीवी के सलाहकार सत्येंद्र रंजन ने कहीं.

उन्होंनेराजनीति मेंझूठका दौरविषय पर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘टेक्नोलॉजी के इस दौर में झूठ का बोलबाला है. पूरी दुनिया में झूठ व झूठे वादों के सहारे चुनाव लड़े व जीते जा रहे हैं. चाहे भारत का 2014 में मोदी की जीत हो या 2016 में अमेरिका में डॉनल्ड ट्रम्प की जीत हो.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हाल के चुनावों के मद्देनज़र भाजपा समर्थकों ने फेसबुक और वाट्सऐप के लिए हज़ारों मैसेज़ तैयार किए है, जो लोगों में अब घूमना शुरू हो गया है.’

नोटबंदी के हवाले से उन्होंने बताया कि इसका कोई असर यूपी चुनाव में पड़ने नहीं जा रहा है, क्योंकि लोग मज़ेदार झूठ बोलने वाले उम्मीदवारों पर भी विश्वास कर लेते हैं. हद तो ये है कि जिस झूठ के कारण उन्हें परेशानी होती है, उस झूठ पर भी आंख मूंदकर वो उन्हीं पर भरोसा करते हैं. अब नोटबंदी से ग़रीबों व छोटे रोज़गार वालों को सबसे अधिक नुक़सान हुआ. रोज़गार के अवसर कम हुए हैं. डिजिटल भुगतान के कारण छोटे दुकानदारों की बिक्री प्रभावित हुई है लेकिन बावजूद इसके गरीब वर्ग यह सोचकर खुश है कि नोटबंदी से अमीरों को ज्यादा नुक़सान हुआ है. हालांकि स्थिति ऐसी बिल्कुल नहीं है, बल्कि मामला बिल्कुल उलट है

उन्होंने इस बात का भी ज़िक्र किया कैसे अब चुनाव में बीजेपी इसी नोटबंदी का फ़ायदा उठाना चाहती है? यूपी में लोगों के वाट्सऐप पर ये मैसेज आने शुरू हो गए हैं कि नोटबंदी से मोदी जी ने मुसलमानों को ठीक कर दिया. क्योंकि इस्लाम में ब्याज लेना हराम है. इसलिए वे अपने पैसे को बैंकों में जमा कराकर अपने पास रखते थे, जिन्हें नोटबंदी के आदेश ने कागज़ के टुकड़ों में तब्दील कर दिया है.  

इस कार्यक्रम में जामिया के छात्र और सैकड़ों की संख्या में स्थानीय निवासी शामिल थे. इसगुफ्तगूका संचालन फ़ातिमा फ़रहीन कर रही थीं तो वहीं हसन अकरम ने कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन दिया.

बताते चलें कि सत्येन्द्र रंजन एक वरिष्ठ पत्रकार हैं. पत्रकारिता जगत में उनका एक लंबा करियर रहा है. राज्सभा टीवी में सलाहकार के साथसाथ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एजेके मास कम्यूनिकेशन रिसर्च सेन्टर में फैकल्टी हैं. इसके अलावा वो इस समय पीयूसीएल के दिल्ली चैप्टर के उपाध्यक्ष भी हैं.

वहीं जामिया क्लेक्टिव कलाकारों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के ज़रिए शुरू किया गया एक प्लेटफॉर्म है, जिसका मक़सद देश में विविधता, बहुलवाद और संवैधानिक मूल्योंको बढ़ावा देना है. मीडिया, संस्कृति, कानून, विज्ञान, कला, मानव अधिकार, लैंगिक समानता, फिल्म, संगीत जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों के बीच की बढ़ती खाई को पाटना इनके मुख्यउदेश्य में शामिल है. जामिया क्लेक्टिव हर दूसरे शनिवार को ये गुफ़्तगू प्रोग्राम आयोजित करता है

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