‘2019 का साल और खतरनाक होगा…इसे भूलना नहीं’: अशोक वाजपेयी

अशोक वाजपेयी

TCN News 

“हम आज के समय के विरूद्ध बोल रहे हैं… इस वक़्त की ज़रूरत है कि इप्टा के इस 75वें साल में सांस्कृतिक अन्तःकरण को फिर से बनाया जाये जिससे पूरी जिम्मेदारी और हिम्मत के साथ हमें इसे गढ़ें। हमारी अन्तःकरण की बिरादरी बहुलतावादी होगी। इस बिरादरी में वे ही बाहर होंगे जिनका न्याय, समता और बराबरी के मूल्यों में पूरा यकीन होगा।”


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ये बाते वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपेयी ने इप्टा प्लैटिनम जुबली व्याख्यान – 4 में कहीं। उन्होंने अपने शब्दों से देश के सांस्कृतिक-सामाजिक स्थितियों पर संस्कृतिकर्मियों की एकजुटता का आह्वान किया।

पी० सी० जोशी की स्मृति में बिहार इप्टा द्वारा आयोजित प्लैटिनम जुबली व्याख्यान -4 में बोलते हुए अशोक वाजपेयी ने कहा कि आज धर्म और संस्कृति के नाम पर हत्या हो रही है, लेकिन आश्चर्जनक है कि सारे धार्मिक नेता चुप हैं। कोई भी धार्मिक गुरू, धार्मिक नेता इन हत्यों, भीड़तंत्र हिंसा के खिलाफ बोल नहीं रहा है।

आगे उन्होंने कहा कि आज का हिन्दुस्तान में हर 15 मिनट में एक दलित पर हिंसा हो रही है। रोजाना 6 दलित महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहा है। आज देश के राज्यों की कोई भी राजधानी नहीं बची और कोई प्रमुख नगर और कस्बा नहीं बचा है, जहां हिंसा न हुई हो। साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि 2017 का साल सबसे खराब साल रहा है। औसतन रोज हिंसा हो रही है। 2019 का साल और खतरनाक होगा। इसे भूलना नहीं चाहिए।

देश की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए श्री वाजपेयी ने कहा कि देश में हिंसक, आक्रामक एवं भीड़तंत्र की संस्कृति पनप रही है और दुर्भाग्य से इसे लोक सहमति भी मिल रही है। सांस्कृतिक अन्तःकरण, धार्मिक अन्तःकरण और मीडिया में अन्तःकरण समाप्त हो गया है। कोई आवाज़ सुनाई नहीं देती। ऐसे वक्त में क्या सांस्कृतिक अन्तःकरण संभव बचती है ? अहिंसक, विरोध, प्रतिरोध की कोई जगह नहीं रही है। झूठ, धर्मान्ध, हिंसा का नया भारत पैदा हो रहा है।

प्रोफेसर तरुण कुमार

उन्होंने राजयनीतिक प्रहार करते हुए कहा कि स्वच्छ भारत बनाने के लिए पूरे भारत की गंदगी को यहाँ के नागरिकों के दिमाग में भरा जा रहा है। आज का भारत महाजनी सभ्यता के समाने सेल्फी लेता नजर आ रहा है। तोड़ने वाले इतने मशगुल है कि उनसे राम मंदिर तक नहीं बना पा रहे हैं। तकनीक का काम मानव विरोधी गलीज में भारत कर कर रहा है।

कार्यक्रम की शुरूआत में पटना विष्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रो० तरूण कुमार ने कहा है कि आज के दौर वह जब एक विधायक बौद्विक कार्यकर्ताओं को गोली मारने की धमकी देता है और मुक्तिबोध के शब्द एक बार फिर से प्रसांगिक होते हैं कि क्या कभी कभार अंधेरे समय में रोशनी भी होती है?

इस अवसर पर बड़ी संख्या में कवि, लेखक, साहित्यकार, कलाकार और संस्कृमिकर्मी उपस्थित थें।

मशहूर कवि अरुण कमल और अशोक वाजपेयी

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