Home Lead Story रहस्यमयी कारणों से छह लोगो की मौत

रहस्यमयी कारणों से छह लोगो की मौत

आस मोहम्मद कैफ, TwoCircles.net 

मुजफ्फरनगर से आठ किमी दूर चरथावल मार्ग पर मुस्लिम बाहुल्य गांव दधेडू में पिछले सात दिन में रहस्यमयी बीमारी से छह मौत हो चुकी है. इन मौतों का कारण नहीं चल पाया. स्वास्थ्य विभाग द्वारा गाँव में चिकित्सा कैंप लगाया जा चूका हैं. किसी भी शव का पोस्टमार्टम न होने की वजह से कारण पता नहीं लग सका हैं. इसके अलावा गाँव में एक दर्जन पशु भी दम तोड़ चुके हैं.

लगभग छह हजार की मुस्लिम आबादी वाले इस गांव में ताबड़तोड़ मौतों से दहशत व्याप्त हैं. मृतको में 18साल की दो सगी बहनों सहित 75 साल का एक बुजुर्ग भी शामिल है.

गांव के प्रधान हुसैन अहमद के मुताबिक “एकदम और अचानक सब कुछ हुआ डॉक्टर को बुलाने का मौका ही नही मिला पांच मिनट में सब खत्म हो गया.एक भी मरीज को दिल का दौरा नही पड़ा, सिर्फ एक के सिर में दर्द हुआ, लगभग एक दर्जन जानवर ऐसे ही खड़े खड़े गिर कर मर गए.

मंगलवार को चिकित्सा अधिकारी अनुज कुमार के नेतृत्व में एक टीम गांव में मृतको के परिवारों से मिली. स्थानीय निवासी जावेद त्यागी के मुताबिक डॉक्टर चेहरे पर मास्क लगाकर मर्तक के परिजन के नजदीक आते हुए डर रहे थे उन्होंने सिर्फ खानापूर्ति की और बुखार नजले की दवाई बांट गये, जबकि गांव में भारी दहशत का माहौल है.

गाँव में मौतों का सिलसिला शनिवार को शुरू हुआ जब तरन्नुम(27) की अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए मौत हो गई थी.सोमवार को बाथरूम से नहाकर निकली उसकी छोटी बहन अनम(23)अचानक खड़े खड़े गिर गयी और मर गई.

तरन्नुम और अनम की मां तसव्वर जहां (51) के अनुसार “पता नही क्या हुआ न कोई चीस न चबक अपने बच्चे को दूध पिला रही थी बस एकदम नीली पड़ गई पता नहीं क्या हुआ डॉक्टरों को पता नही चल क्या हुआ ऐसे ही दूसरी बहन खड़ी खड़ी गिर गई उसने कहा चक्कर आ रहा है बस उसकी मौत हो गई “.

गांव में पूरी तरह सन्नाटा छाया पड़ा है और हर घर मे दहशत है ज्यादातर लोग इसे दिल की बीमारी मान रहे है,मगर डॉक्टर एनपी त्यागी इससे इंकार करते है वो कहते है “दिल का दौरा पड़ने पर समय लेता है.बिना पोस्टमार्टम के सच सामने आने मुश्किल है.

गांव के दूसरे छोर पर रह रहे मोनिश(18) की मौत भी इसी तरह हो गई उसके पिता गय्यूर कहते हैं “मेरा बच्चा को कोई टेंशन भी नही थी मैं दिल के दौरे की बात कैसे मान लूं,सरकार ने अनपढ़ डॉक्टर भर्ती कर रखें”.

गांव के लोग बताते है इन मौत में किसी तरह के किसी लक्षण का पता नहीं चलता.बस इतना कहा जा सकता है कि इंसानों और जानवरों की मौत में समानता है.उरूज गाड़ा बताते है कि”उसके भाई की भैंस एक बार पीछे हटी और फिर आगे बढ़ी और उसके बाद गिर कर उसकी मौत हो गई.

हैरत की बात यह है इतने बड़े गांव में कोई सरकारी चिकित्सा सुविधा नही है.गांव के लोग लंबे समय से यहां एक स्वास्थ्य केंद्र की मांग करते आ रहे हैं .मगर चिकित्सा अधिकारी अनुज सिंह कहते हैं कि फिलहाल वो गांव में एक कैम्प लगवा रहे है.

ग्रामीण तहसीन कहते हैं “अगर झोलाछाप डॉक्टर न हो तो लोग यहां और अधिक बीमार पड़ जाते और उन्हें कोई प्राथमिक उपचार न मिल पाता।

सात दिन के बाद चिकित्सा विभाग ने ने आज गांव का दौरा किया. थे मगर देने के लिए उनके पास सिर्फ बुखार और सरदर्द की दवाइयां थी.एक सप्ताह से इन चिंताजनक हालात का सामना कर रहे इस गांव में स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ औपचारिकता निभाई.

चरथावल चिकित्सा प्रभारी डॉ अनुज सिंह के अनुसार वो कुछ भी नहीं समझ पाए कि यह बीमारी है क्या. बिना पोस्टमार्टम के यह पता लगाना लगभग असंभव है.

गांव के प्रधान हुसैन अहमद कहते है “सभी लोगो को दफनाया जा चुका है और बड़े अधिकारियों ने अब तक इसका प्रयास भी नही किया वो गांव आकर बात करते तो लोग पीएम (पोस्टर्माटम) भी करवाते.मगर ऐसा लगता है कि हमे हमारे हाल पर छोड़ दिया गया है.

मुजफ्फरनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी पीके मिश्रा दो बहनों की मौत को संदिग्ध हालात में हुई मौत मान रहे है,जबकि निपाह वायरस के शक वाली मौत को ब्रेन हैमरेज बता रहे है,बाकि को सामान्य मौत कह रहे हैं.वो कहते हैं “हमने स्थानीय प्रधान समेत गांव के जिम्मेदार लोगों से आग्रह किया मगर कोई पोस्टमार्टम के लिए राजी नही हुआ बिना पोस्टर्माटम के रहस्य पता नही चल पाएगा.फिलहाल गांव पर हमारी कड़ी नज़र है और एक टीम वहीं केम्प किये हुए हैं”.