छत्तीसगढ़ में प्रेम विवाह, आरएसएस ने लव जिहाद कह कर किया अलग

By अनुज स्रिवास्तवा, TwoCircles.net

छत्तीसगढ़: धमतरी ज़िले के रहने वाले मो. इब्राहिम उर्फ़ आर्यन आर्य और अंजली जैन ने 4 साल तक प्रेम सम्बन्ध में रहने के बाद 25 फ़रवरी 2018 को रायपुर के आर्यसमाज मंदिर में हिन्दू वैदिक रीति के अनुसार शादी की. उनकी शादी को 18 महीने हो चुके हैं पर वे चाह कर भी कभी साथ में नहीं रह पाए. सिर्फ़ इसलिए कि लड़की के पिता और RSS की नज़र में ये प्रेम नहीं लव जिहाद है.


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इन दो प्रमियों की कहानी शुरू होती है साल 2014 में. अंजलि BBA की पढ़ाई कर रही थी और इब्राहिम इवेन्ट मैनेजमेंट का काम करता था. इसी काम के सिलसिले में अंजलि के कॉलेज भी उसका आना-जाना था, यहीं दोनों की मुलाक़ात हुई. इब्राहिम तब शादीशुदा था. 10 जुलाई 2017 को शरिया कानून के अनुसार एक सामाजिक बैठक में इब्राहिम ने पहली पत्नी मोसमा बानो से तलाक ले लिया.

 

हमारा क्रूर समाज जो अलग जातियों में शादी करने पर भी अपने बच्चों को पेड़ से लटका के मार देता है वहां इन दोनों प्रेमियों का अलग धर्म इनके लिए बड़ी चिंता बना हुआ था. लिहाज़ा 25 फ़रवरी 2018 को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के टिकरापारा स्थित आर्यसमाज मंदिर में इब्राहिम सिद्दीक़ी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हिन्दू धर्म स्वीकार किया. ये सोचकर कि हिन्दू हो जाने के बाद अंजलि के घर वाले उसे स्वीकार कर लेंगे, वो इब्राहिम सिद्दीकी से आर्यन आर्य हो गया. और इसी दिन घर वालों को बताए बगैर दोनों ने आर्यसमाज में ही शादी कर ली.

आर्यन ने बताया कि शादी के बाद वो धमतरी वापस लौट आया. 2 महीने का बचा हुआ कोर्स पूरा कर अंजलि भी घर चली गई. 17.04.2018 को रायपुर नगर निगम ने उन्हें शादी सर्टिफिकेट जारी किया गया. जून महीने में अंजलि के पिता को जब शादी की ये बात मालूम पड़ी तो उन्होंने दंपत्ति पर अलग हो जाने का दबाव बनाया. अंजलि ने पति के पास जाना चाहा लेकिन उसके पिता अशोक जैन के मन में हिन्दू-मुस्लिम का ज़हर इस कदर तेज़ी पे था कि उनहोंने अपनी ही बेटी को घर में बंधक बना लिया.

पुलिस भी अक्सर “हम” और “वे” का व्यवहार करती है

हिन्दू-मुस्लिम वाले विवाद में पुलिस भी अक्सर “हम” और “वे” का व्यवहार करती नज़र आती है. तमाम शिकायतों के बावजूद जब पुलिस ने संविधान अनुसार व्यवहार नहीं किया तब अपनी पत्नी को उसके घर वालो की इस कैद छुडाने के लिए आर्यन ने 3 जुलाई 2018 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeus Corpus) दायर की. अदालत ने 19 जुलाई को अंजलि को कोर्ट में प्रस्तुत करने का आदेश दिया.

परन्तु पुलिस ने अंजलि को अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया. इससे पहले ही पिता द्वारा उसे मानसिक रोगियों के अस्पताल में भर्ती कर दिया गया और अदालत में बयान दिया कि चूंकि लड़की मानसिक रोगी है इसलिए उसकी शादी को अमान्य करार दिया जाए. मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार अंजलि को मानसीक रूप से पूरी तरह स्वस्थ पाया गया. आखिरकार अंजलि को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया. कोर्ट में अंजलि ने बयान दिया कि वो अपने पति इब्राहिम सिद्दीकी उर्फ़ आर्यन आर्य के साथ जाना चाहती है. पर कोर्ट के बाहर हिन्दू संगठनों ने माहौल ऐसा बिगाड़ रखा था कि अंजलि को पति के पास न भेजकर बिलासपुर के गर्ल्स हॉस्टल भेजने का आदेश दिया गया. सड़कों पर हिन्दू संगठनों का हो-हल्ला जारी था.

गर्ल्स हॉस्टल में घुस आते थे हिन्दू संगठन के लोग

अंजलि ने बताया कि आए दिन हिन्दू संगठन के लोग हॉस्टल में जमा होकर दबाव बनाते थे. आर्यन ने बताया कि जब भी वो हॉस्टल में अंजलि से मिलने जाता था वहां हिन्दू संगठनों के 15-20 गुंडे मौजूद रहते थे जो उसे अंदर जाने रोकते थे. आर्यन ने बताया कि हिन्दू युवा वाहिनी की कोई महिला नेता हॉस्टल के अंदर जाकर अक्सर अंजलि को डराया धमकाया करती थी. हॉस्टल प्रबंधन ने इन संगठनों के लोगों के आने जाने पर कभी रोक नहीं लगाई.

आरोपी के पक्ष में पुलिस

3 अगस्त 2018 को अंजलि के पिता अशोक जैन हॉस्टल पहुचे, वार्डन को किसी अन्जान पाउडर की पुड़िया देते हुए उसे अंजलि के खाने में मिलाने को कहा, बात अंजलि को मालूम चल गई और उसने उस दिन खाना ही नहीं खाया. दो दिन बाद 6 अगस्त को अशोक जैन फिर हॉस्टल आए और अपने हाथ से ज़बरदस्ती अंजलि को समोसा खिलाया. कुछ ही घंटो बाद अंजलि की तबियत बिगड़ने लगी, शरीर ऐंठने लगा. उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. पिता अशोक जैन पुलिस की इजाज़त के बगैर ही अंजलि को सरकारी अस्पताल से उठा ले गया.

ऐसे केन्द्रों से जब किसी को अस्पताल लेजाया जाता है तो चौबीस घंटे उसकी सुरक्षा में किसी सिपाही को तैनात रहना होता है. यहाँ पर ये सवाल तो है ही कि ऐसी सुरक्षा के बावजूद अशोक जैन जो कि ख़ुद आरोपी है अंजलि को सरकारी अस्पताल से उठाकर कैसे ले गया, क्या वहां पुलिस मौजूद नहीं थी? क्या पुलिस भी आरोपी से मिली हुई थी?

आर्यन ने पोलिस में शिकायत की लेकिन अंजलि का कुछ पता नहीं चल पाया. 14.08.2018 को आर्यन ने सुप्रीम कोर्ट में SLP (केस नों. 6710/2018) दायर की. इसके एवज में 27.08.2018 को अंजलि को कोर्ट में लाया गया. अंजलि ने कोर्ट में कहा कि उसने अपनी मर्ज़ी से आर्यन से शादी की थी पर अभी वो अपने परिवार के साथ जाना चाहती है. कोर्ट ने मामले को पारिवारिक झगड़ा बताया और कहा की पक्षकार इसके निपटारे के लिए कुटुम्ब न्यायालय(Family Court) में वाद दायर कर सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि लड़की बालिग़ है और समझदार है, वो अपनी इच्छा से जिसके साथ रहना चाहे रह सकती है.

 

दवाएं खिलाकर पागल बनाने की कोशिश

07 महीने बीत गए. 17.03.2019 को अंजलि ने चोरी-छिपे किसी दोस्त से मोबाइल मांगर धमतरी DGP को फ़ोन किया कहा “मेरे माता-पिता ने मुझे घर में बन्द कर रखा है, प्लीज़ मुझे बचा लीजिए”. तब पुलिस अंजलि को रेस्क्यू किया धमतरी सखी वन स्टॉप सेंटर ले गई पर हिन्दू संगठनों के बढ़ते उत्पात के चलते अंजलि को राय शिफ्ट किया गया. सखी वन स्टॉप सेंटर में 24.03.2019 को दिए गए अपने बयान में अंजलि ने साफ़-साफ़ ये बात कही कि “इन सात महीनों तक उसके घरवालों ने उसे बंधक बनाए रखा था. मारपीट करते थे, भद्दी गालियां देते थे और उसे मानसिक रोगी बनाने के लिए खाने में तरह-तरह की दवाएं मिलाकर खिलाते थे. हिन्दू संगठन के लोग लगातार जान से मारने की धमकी देते थे, एक बार तो इतना मारा था कि एक हांथ टूट गया था, उसके इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा था.” हमसे बात करते हुए अंजलि के पति आर्यन ने बताया कि अंजलि को पैरालिसिस रोगियों को दी जाने वाली दवा भी खिलाई गई थी. इस दवा के बारे में डॉक्टरों का कहना है कि इसके सेवन से किसी स्वस्थ व्यक्ति का शरीर लकवाग्रस्त भी हो सकता है.

पिता ने दी थी जान से मारने की धमकी

अंजलि ने लिखित में ये भी बयान दिया है कि 27.08.2018 को सुप्रीम कोर्ट में परिवार के साथ जाने की बात उसने इसलिए कही थी क्योंकि उसके पिता अशोक जैन ने ऐसा बयान न देने पर उसे और उसके पति को जान से मार देने की धमकी दी थी.

RSS वालों ने दी जान मारने की धमकी

अंजलि ने सखी वन स्टॉप सेंटर रायपुर में लिखित रूप में ये बयान दिया है कि उसके पिता उसे ज़बरदस्ती सूरत की किसी धर्मशाला में लेकर गए थे जहां पर RSS वालों द्वारा उसे धमकी दी गई कि यदि तुम मुस्लिम लड़के के साथ जाओगी तो तुम्हें जान से मार देंगे.

 

आर्यन का आरोप है कि “इस बीच अंजलि के पिता अशोक जैन हिन्दू संगठनों के साथ मिलकर पूरे इलाके में धार्मिक अलगाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. कट्टर हिन्दू संगठनों के साथ मिलकर वे जुलूस निकालते हैं, मुझे जिहादी कहकर बदनाम करते हैं. हमारे सीधे से प्रेम विवाह को लव जिहाद कह रहे हैं, इलाके के मुसलामानों में भी डर पैदा होने लगा है.”

अंजलि और आर्यन की शादी के ख़िलाफ़ और आर्यन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए अंजलि के पिता अशोक जैन ने बिलासपुर हाईकोर्ट में 3 याचिकाएं दायर की हुई हैं. इन याचिकाओं को कोर्ट बराबर इंटरटेन कर रहा है. लेकिन अंजलि द्वारा हाईकोर्ट में दिए किसी भी आवेदन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फ़ैसले की अवमानना

आश्चर्य की बात है कि 27.07.2019 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई करते हुए मुख्या न्यायाधीश पीआर रामचन्द्र मेनन ने ये फैसला सुनाया था कि “लड़की बालिग है, उसने कोर्ट के सभी सवालों के जवाद पूरे विशवास से दिए हैं. ये पूरी तरह उसका फैसला है कि वो किसके साथ रहना चाहती है. लड़की ने कहा कि वो अपने पति इब्राहिम सिद्दीकी उर्फ़ आर्यन आर्य के साथ जाना चाहती है. कोर्ट को ऐसा बिलकुल नहीं लगा कि ये बयान उसने किसी दबाव में आकर दिया.” हाईकोर्ट के इस फ़ैसले के बाद अंजलि को उसकी मर्ज़ी से जाने देना चाहिए था. पर इस आदेश के 7 महीने बाद भी उसे सखी वन स्टॉप सेंटर में बंद रखा गया है. जान से मारने मारने की धमकी देने वाले अशोक जैन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. उलटे अंजलि के पति को ही 2 महीने के लिए जेल में बंद कर दिया गया था. सखी सेंटर में भी अंजलि को परेशान करने के लिए दूसरे सखी सेंटर्स से अलग तरह-तरह के नियम बना दिए गए हैं. सोने के समय का नियम, सुबह उठने के समय का नियम, कैसे बैठना है उसका नियम और कोई मिलने आए तो उससे कितनी दूर बैठना है उसका नियम, टीवी देखन है या नहीं देखना है उसका नियम. कुल मिलाकर इस प्रेमी जोड़े को परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ा जा रहा है.

अंजलि की शिकायत पर सुनवाई कहीं नहीं

घर की सात महीनों की यातनाओं भरी कैद से छूटकर रायपुर के सखी वन स्टॉप सेंटर में रहते हुए भी अंजलि को लगभग सात महीने हो गए हैं. इन सात महीनों में उसने पिता और घरवालों द्वारा की गई मारपीट, बार-बार ज़बरदस्ती मानसिक चिकित्सालय भेजना, खाने में ज़बरदस्ती दवाएं मिलकर खिलाने, पति को जान से मारने की धमकी देने और ज़बरदस्ती बंधक बनाकर रखने की लिखित शिकायत की है, पर शिकायत की कहीं कोई सुनवाई अब तक नहीं हुई है.

फिल्मों में खाप पंचायतों के फैसलों पर नाक-मुह सिकोड़ने वाले हम शहरी लोग हर घर और आसपडोस में चल रही खाप को किस बेशर्मी से नज़रंदाज़ कर देते हैं, आर्यन-अंजलि का ये मामला इसका ही उदागरण है.

इस मामले की सारी तारीखों पर आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि अंजलि-आर्यन का ये मामला देश में हिन्दुत्ववादी सरकार के बहुमत में आने और धार्मिक संगठनों द्वारा की जाने वाली भीड़ की हिंसा और निर्मम हत्याओं को देशभक्ति और देशद्रोह के पैमाने से देखने का दौर था. धर्म -संस्कृति, पवित्र -अपवित्र, हिन्दू राष्ट्र जैसी चर्चाओं के उफान का ये दौर नागरिक और संवैधानिक अधिकारों के पतन का भी दौर है.

ऐसे कठिन समय में अंजलि-आर्यन जैसे प्रेम संबंधों को बचाए रखना पूरे मानव समाज का ज़िम्मा है.

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