कंफ्यूजन :इस कोरोना काल में कुर्बानी होगी या नही !

आसमोहम्मद कैफ़ ।Twocircles.net
लखनऊ-
भारत सरकार ने आज ही अमरनाथ यात्रा स्थगित की है। हरिद्वार में जुटने वाले लाखों कवड़ियाँ इस बार नही पहुंचे है। महाशिवरात्रि पर महादेव के मंदिर सुने पड़े रहे हैं।रक्षाबंधन की कोई हलचल नही है। इस सबके बीच 1 अगस्त को बक़रीद है। इस दिन शनिवार है। उत्तर प्रदेश में यह दिन पूर्ण लॉकडाउन रहता है। ईद उल अज़हा मुसलमानों का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है। ईद उल फितर के बाद दूसरा। ईद उल फितर कोरोना काल की भेंट चढ़ चुका है और देश का दूसरा सबसे बड़ा समुदाय मुसलमान अब बक़रीद को लेकर आशंकित है। मुसलमानों की धार्मिक संस्थाएं सरकार को चिट्ठी लिख रही है कि इस बार उन्हें ईदगाह पर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी जाएं। इदारा ए शरिया फ़िरंगीमहली से हिलाल कमेटी के अध्यक्ष मुफ़्ती अबुल इरफ़ान मियां ने आज ऐलान किया है कि 23 जून को ज़िलहिज्ज की पहली तारीख होगी और इसका यह मतलब है कि एक अगस्त को ईद होगी।
सुन्नत ए इब्राहिम पर अमल करने के लिए मनाई जाने वाली कुर्बानी की इस ईद से पहले इतना कन्फ्यूजन कभी नहीं रहा है। देशभर में ईद की नमाज़ को लेकर भारी संशय तो है ही साथ ही उत्तरी भारत में कुर्बानी को लेकर भी तस्वीर साफ़ नही है।
इसी कन्फ्यूजन के मद्देनजर देवबंद दारुल उलूम के कार्यवाहक मोहतमिम अब्दुल ख़ालिक़ मद्रासी ने स्थानीय प्रशासन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि इस्लाम में कुर्बानी एक बहुत बड़ी इबादत है और इसका कोई विकल्प नही है।
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Photo credit: Aas Mohammed Kaif/ TwoCircles.net[/caption]
ईद की नमाज सोशल डिस्टेंस के साथ ईदगाह में अदा करने की अनुमति दी जाएं। कुर्बानी को घरों के अंदर ही करने की अनुमति दी जाएं और शनिवार और रविवार का लॉकडाउन स्थगित किया जाये। बता दें कि उत्तर प्रदेश में शुक्रवार रात दस बजे से सोमवार सुबह 5 बजे तक पूर्ण लॉकडाउन रहता है। एक अगस्त को रविवार है। इसका यह मतलब है कि सरकार तो इस दिन लॉकडाउन स्थगित करना पड़ेगा या फिर मुसलमानों को ईद पर घरों में रहने होगा।
यह हालात ऐसे समय है कि भारतीय संसद के एक सदस्य शफीकुर्रहमान बर्क ने तो यहां तक कह दिया है कि मस्जिदों में नमाज़ होगी तो ही कोरोना भागेगा। शफीकुर्रहमान बर्क संभल से सांसद है। उन्होंने कहा है कि ईद पर ईदगाह पर नमाज़ पढ़ने की अनुमति होनी चाहिए। मज़हब अलग है मगर सब इंसान है। दुनिया परेशान है। ग़रीब तंग है। रोज़गार ख़त्म हो रहे हैं। हम मस्जिदों में सभी इंसानों के लिए दुआ करेंगे कि यह महामारी दुनिया से चली जाए। शफीकुर्रहमान बर्क ने कुर्बानी का जानवर खरीदने की बात भी उठाई है। उन्होंने कहा कि इस समय जानवरों के बाज़ार बंद है। कुर्बानी के लिए जानवर की जरूरत है। इस समय अगर कोई जानवर ला रहा है तो उसे पुलिस परेशान कर रही हैं। ईदगाह पर सारा मुसलमान इक्क्ठा होकर सब इंसानों के लिए अल्लाह से रो-रोकर दुआ करेगा तो यह अज़ाब चला जाएगा।
उत्तर प्रदेश पुलिस सूत्रों के मुताबिक उन्हें भी अब तक ईद में कुर्बानी को लेकर कोई निर्देश नही मिले हैं। एक उच्च अधिकारी कहते हैं "यह तो निश्चित मान कर चलिए कि ईदगाह में सामुहिक नमाज़ से बचा जाएगा। निश्चित तौर कोरोना के मरीज़ो में बेतहाशा वृद्धि हुई है और खतरा और भी बड़ा हो गया है। किसी भी धार्मिक स्थल पर हजारों लोगों का एक साथ जुटना बेहद आत्मघाती क़दम होगा।"
कुर्बानी को लेकर भी अब तक कोई स्पष्ट आदेश नही है। यही कारण है कि मुसलमानों में बकरा भैंस आदि की खरीदारी नही हो रही है। मूलतः मुसलमान ईद उल अज़हा पर बकरे और भैंस की कुर्बानी करते हैं। कहीं कहीं ऊंट की भी कुर्बानी होती थी मगर पिछले साल उत्तर प्रदेश मेरठ में पुलिस ने ऊंट जब्त कर लिए और उनकी कुर्बानी नही होने दी।
कुर्बानी को लेकर एक और नकारात्मक संदेश यह है कि लगभग हर बक़रीद से दो सप्ताह पहले तमाम थानों में शांति समिति की बैठक शुरू हो जाती है और लोगो को समझाया जाता है कि वो कुर्बानी करते समय अपने पड़ोसियों की जनभावना का ख्याल रखें। कुर्बानी को पर्दे में करें और खून को नालियों में न बहने दें। इसके अलावा अवशेष को अलग ले जाकर मिट्टी में दबा दें।
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Photo credit: Aas Mohammed Kaif/ TwoCircles.net[/caption]
ऐसी ही शांति समिति की बैठक में सालों से शिरकत कर रहे मुजफ्फरपुर के आफ़ताब आलम कहते हैं "इस बार इस तरह की कोई हलचल नही है। अगर कुर्बानी नही होती है तो यह भी बेहद मुश्किल होगा। अगर ऐसा हो जाता है तो इसके लिए अभी से कार्ययोजना बनानी होगी। आफ़ताब बताते हैं कि ऐसा लगता है कि सरकार जल्दी ही कोई गाइड लाइन जारी करेगी। इसमे कुर्बानी पर रोक नही होगी जबकि ईदगाह पर नमाज़ पढ़ने के लिए अनुमति नही दी जाएगी उनके पास एक तर्क है कि उन्होंने अमरनाथ और कांवड़ यात्रा रद्द कर दी है क्योंकि वो भीड़ इकठ्ठा नही होने दे सकते हैं अब मुसलमानों को वो स्पेशल ट्रीटमेंट नही दे सकते हैं "
सबसे खास बात यह है उत्तर प्रदेश में कई जगह पूर्ण लॉकडाउन है जैसे राजधानी लखनऊ के 6 थानों में पूरी तरह से आवाजाही बंद है। बिहार में 31 जौलाई तक सब कुछ बंद है। कोरोना से मरने वालों की मौत अधिक होने लगी है। सरकारी तंत्र अब कमज़ोर पड़ने लगा है। कई डॉक्टर की मौत कोरोना मरीज़ का इलाज़ करते हुए हो चुकी है।
मुरादाबाद के सामाजिक कार्यकर्ता इरशाद खान के मुताबिक ईद उल अज़हा पर कुर्बानी का मसला बेहद पेचीदा है। सरकार को जल्द से जल्द इसे सुलझा लेना चाहिए। लोगो मे कन्फ्यूजन है। ईदगाह पर नमाज़ वाली समझ मे आती है उस पर लोगो की सहमति हो जाएगी मगर कुर्बानी मुसलमानों के गहरे जज़्बात से जुड़ी हैं,ख़ासकर मुस्लिम इलाकों में लोग कुर्बानी करेंगे और पुलिस द्वारा रोके जाने पर समस्या पैदा होगी। सरकार को चाहिए वो इस पर तस्वीर को जल्द से जल्द साफ करें !
