बड़े जानवरों की कुर्बानी को लेकर सरकारी मनमानी से जमीयत नाराज़

स्टाफ़ रिपोर्टर । Twocircles.net

बक़रीद पर कई जगह कुर्बानी के जानवरों को पुलिस द्वारा कब्ज़े में लिए जाने पर जमीयत उलेमा ए हिन्द ने कड़ी नाराजग़ी जताई है। जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष (महमूद मदनी गुट) मौलाना क़ारी सैयद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी ने देश के विभिन्न भागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश में क़ुर्बानी को लेकर ज़िला पुलिस प्रशासन के माध्यम से तानाशाही और अत्याचार किए जाने पर नाराजग़ी का इज़हार किया है


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उन्होंने कहा है कि कुर्बानी में कोई रुकावट खड़ी न की जाए। क़ारी उस्मान ने बयान जारी कर कहा है कि जमीयत को लिखित तौर पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से शिकायतें मिली हैं कि पुलिस जानवरों को पकड़ कर ले जा रही है बहराइच, गाज़ीपुर, गाज़ियाबाद आदि में ज़िला प्रशासन ने बड़े जानवरों की क़ुर्बानी पर रोक लगा दी है। इसी तरह से देश के विभिन्न भागों से भी ऐसे ही क़ुरबानी में रुकावटों वाले समाचार प्राप्त  हो रहे हैं। सवाल यह है कि आख़िर पुलिस ने किस क़ानून के तहत बड़े जानवरों पर प्रतिबंध लगाया है! यह सब किसके इशारे पर कर रही है-? इस संबंध में पुलिस के माध्यम से अत्याचार, बर्बरता और तानाशाही तथा खुलेआम क़ानून का मज़ाक  बनाए जाने से जनता में तीव्र असंतोष और रोष पाया जा रहा है। हम पुलिस के इस तरह के अत्याचारों की घोर निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि सरकारें इन सब पर तुरंत रोक लगाएं। और इस बात को सुनिश्चित बनाया जाए कि मुसलमान पूरी सरलता के साथ क़ुर्बानी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य को पूर्ण कर सकें।

जमीयत उलमा ए हिंद के सदर ने कहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग और क़ुर्बानी से संबंधित सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है उस पर जनता चल रही है। मुस्लिम नेता तथा संस्थाएं इसके संबंध में लोगों को लगातार जागरुक कर रहे हैं। जहां तक गाइडलाइन की बात है तो इसमें कहीं भी बड़े जानवर की क़ुर्बानी पर प्रतिबंध नहीं है। अगर पुलिस प्रशासन इससे बढ़कर किसी के धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप करती है और मनमर्ज़ी के आदेश – नियम थोपती है तो इसके परिणाम बहुत ख़राब और नकारात्मक हों सकते है।

इसी दौरान मौलाना अरशद मदनी ने भी मुसलमानों को सलाह दी है कि वह मस्जिदों या घरों में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश को सामने रखते हुए ईद-उल-अजहा की नमाज़ अदा करें। उन्होंने मश्वरा दिया है कि सूरज निकलने के बीस मिनट के बाद संक्षिप्त रूप से नमाज़ और खुतबा अदा करके कुर्बानी कर ली जाए और गंदगी को इस तरह दफ्न किया जाये कि उससे बदबू न फैले। मौलाना मदनी ने देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए मुसलमानों से यह अपील भी की कि वह कानून के दायरे में रहते हुए दीन व शरीअत पर जरूर अमल करें। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से मीडिया और विशेषकर  सोशल मीडिया पर  कुर्बानी के सम्बंध में नकारात्मक टिप्पणियां और भ्रामिक प्रचार हो रहे हैं, हमें उन पर ध्यान देने की इतनी आवश्यकता नहीं है। इस्लाम में कुर्बानी का कोई विकल्प नहीं है, यह एक मज़हबी फरीज़ा (धार्मिक कर्तव्य) है। जिसका पूरा करना हर योग्य मुसलमान पर वाजिब अर्थात आवश्यक है, इसलिए जिस पर कुर्बानी वाजिब है उसे हर हाल में यह फर्ज़ अदा करना लेकिन कोरोना वाइरस के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय और ज़िला प्रशासन के दिशा-निर्देश के अनुसार इस फ़र्ज़ को अदा किया जाना चाहिए।

मौलाना अरशद मदनी ने  भी किया कि जिस जगह कुर्बानी होती आई है और फिलहाल वहां भी बड़े जानवर की कुर्बानी में किसी प्रकार की दिक़्क़त हो तो वहां कम से कम बकरे की कुर्बानी ज़रूर की जाये और प्रशासन के कार्यालय में नियमानुसार इसको पंजीकृत कराया जाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई समस्या उत्पन्न न हो। इसलिये इन सभी बातों को देखते हुए ईद-उल-अज़हा के अवसर पर परंपरा के अनुसार कुर्बानी अवश्य करनी चाहिए। मौलाना मदनी ने वर्तमान महामारी को देखते हुए यह महत्वपूर्ण सलाह भी दी कि कुर्बानी के दौरान सभी सावधानियों का पालन किया जाए। सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए आपसी मेल-जोल और भीड़ इकट्ठा करने से बचा जाए। रास्तों और गलियारों में कुर्बानी न की जाए। खून, गंदगी और अतिरिक्त अंगों को कहीं फेंकने के बजाय दफ्न कर दिया जाए या उन्हें कूड़ा करकट के लिए चयनित स्थान तक पहुंचा दिया जाए।

सफाई और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कुर्बानी के दौरान इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि हमारे इस कार्य से किसी दूसरे को असुविधा न हो और न ही किसी का दिल आहत होने का कारण बने। अंत में उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से बचें।

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