दिल्ली हिंसा: पुलिस की शर्मनाक हरकत, 14 साल के नाबालिग़ को भेजा जेल, अदालत ने भी नहीं दी बेल

सांकेतिक तस्वीर

इसरार अहमद, Twocircles.net

दिल्ली। दिल्ली में तीन दिन हुई हिंसा के बाद हिंसाग्रस्त इलाक़ो से हर दिन दिल दहला देने वाली और शर्मनाक कहानियां सामने आ रहीं हैं। ऐसी ही एक कहानी मुस्तफ़ाबाद के पास चांदबाग़ से सामने आई है। यहां दिल्ली पुलिस ने 14 साल के एक नाबालिग़ बच्चे को 18 साल का बताकर जेल भेज दिया है। उस पर 11 गंभीर धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि अदालत में मजिस्ट्रेट ने भी बच्चे की उम्र पर कोई संज्ञान नहीं लिया। ‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’ कहावत की यह जीती जागती मिसाल है।


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मामला चांदबाग़ का है। यहां 25 फरवरी को भड़की हिंसा के दौरान लापता हुए 14 साल के अमान अली के बारे में कई दिन परिवार को पता चला है कि वो नॉर्थ ईस्ट दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। पुलिस ने हिंसा में शामिल होने के आरोप में उसे जेल भेज दिया है। उसके ख़िलाफ़ भारत दंड संहिता की 11 धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है। इनमें सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने से लेकर दंगों में शामिल होने और घातक हथियार रखने से लेकर आगज़नी करने तक के आरोप हैं। दिल्ली पुलिस की इस हरकत को बेहद शर्ममाक माना जा रहा है।

कड़कड़डूमा कोर्ट

अमान अली की मां राबिया ख़ातून ने बताया कि 25 फरवरी की सुबह उन्होंने अपने 14 साल को बेटे को अपने 10 साल के छोटे भाई की तलाश करने के लिए भेजा। वो पहले घर से बाहर गया हुआ था। उस वक़्त चांदबाग समेत उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़की हुई थी। राबिया को अपने छोटे बेटे का फिक्र हो रही थी। इसी लिए उसने बड़े बेटे के उसे वापिस लाने के लिए भेजा था। छोटा बेटा तो कुछ घंटे बाद घर वापस आ गया। उसने बताया कि वह पड़ोसी के घर में खेल रहा था। लेकिन उसे ढूंढने निकला उसका बड़ा भाई वापस नहीं आया। पांच दिन बाद उन्हें पता चला कि वो जेल में हैं।

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, लड़के को 28 फरवरी को कड़कड़डूमा ज़िला अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बताया जा रहा है कि एफ़आईआर में उसकी उम्र का ज़िक्र नहीं है। इससे भी ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि अदालत में सुनवाई को दौरान मजिस्ट्रेट ने भी लड़के की उम्र का संज्ञान नहीं लिया। किशोर न्याय अधिनियम के मुताबिक़ नाबालिगों को नियमित जेल में नहीं रखा जा सकता। इस मामले में पुलिस ने इस क़ानून की धज्जिया उड़ाई हैं और अदालत ने पुलिस की हरकत पर पर्दा डाला है।

परिवार के मुताबिक अमान की उम्र अभी पूरी तरह चौदह साल भी नहीं है। आधार कार्ड के मुताबिक़, उसकी जन्म तिथि 21 नवंबर 2006 लिखी है। इस हिसाब से वो पूरा तरह नाबालिग़ है। अमान की मां राबिया ख़ातून कहती है, “अमान पिछले साल 13 साल का हुआ है। वो इस साल नंवंबर में 14 साल का हो जाएगा।” राबिया एक घरेलू कामगार हैं। वो कई घरों में झाडू-पोंछा और बर्तन धोने का काम करती हैं। उनके पति, सरवर अली एक बुग्गी चलाते हैं। ग़रीबी की वजह से पांचवी के बाद अमान ने स्कूली पढाई छोड़ दी थी।

ग़ौरतलब है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता सीआपपीसी की धारा 41 के मुताबिक़ पुलिस के लिए यह गिरफ़्तारी किए गए लोगों के परिवार वांलों गिरफ़्तारी की जानकारी देना ज़रूरू होता है। इस मामले में पुलिस ने नियम का पालन नहीं किया। परिवार को अमान की गिरफ़्तारी की कोई सूचना नहीं दी। राबिया ख़ातून ने बताया कि कि उन्हें 28 फरवरी को शख़्स ने उनके बेटे की गिरफ़्तारी की जानकारी दी थी। उसने ख़ुद को वकील बताया था। राबिया कहती है, “उन्होंने मुझे बताया कि मेरे बेटे को पुलिस ने खजूरी ख़ास में हुई हिंसा के लिए उठाया है।” राबिया आगे बताती हैं, “उसने मुझसे कहा था कि वो मुझे इस मामले की अगली तारीख़ के बारे में बताएंगे।”

Rabia Khatoon, Chandbagh

हमने राबिया ख़ातून से नंबर लेकर उन्हें फोन करने वाले शख़्स से संपर्क किया। उसने उसने ख़ुद को एक लॉ फ़र्म में बतौर इंटर्न काम करने वाला जूनियर वकील बताया। उस ने कहा कि अदालत में पेश होने के दौरान अमान ने राबिया ख़ातून का नंबर उन्हें दिया था। उसने बताया कि वो वरिष्ठ आपराधिक वकील अब्दुल ग़फ्फार के साथ काम करते हैं। अब्दुल ग़फ़्फ़ार ने दंगों से संबंधित मामलों में गिरफ़्तार किए गए लोगों की क़ानूनी मदद कर रहे हैं। संपर्क करने पर ग़फ़्फ़ार ने बताया कि पुलिस 28 फरवरी को अमान को कड़कड़डूमा अदालत में ले गई थी। वहां वो उससे मिले थे। उनसे अपना नाम अमान अली और उम्र 18 साल बताई थी। ग़फ्फार ने कहा कि वो इस मामले में उस लड़के और अन्य अभियुक्तों की तरफ़ से अदालत में पेश हुए थे।

खजूरी ख़ास पुलिस थाने में दर्ज की गई एफ़आईआर में भी लड़के का नाम अमान ही लिखा है। हालांकि इसमें उसकी उम्र का हवाला नहीं दिया गया है। इस मामले के जांच अधिकारी विपिन कुमार तेवतिया ने कहा कि लड़के ने जो नाम औऱ उम्र के बारे में जो जानकारी दी थी हमने एफ़आईआर में वही जानकारी दर्ज की है। तेवतिया के मुताबिक़ उसने यह खुद को नाबालिग़ नहीं बताया था। तेवतिया ने थोड़ा तल्ख़ लहजे में कहा, “अगर उसने अपने नाम और उम्र के बारे में झूठ बोला है, तो यह भी एक अपराध है।” यह पूछने पर वो कुछ नहीं बोले कि क्या उसके ख़िलाफ़ ग़लत उम्र बताने का भी मुक़दमा दर्ज किया जाएगा।

Amaan Ali

तेवतिया के दावे पर राबिया ख़ातून ने कहती हैं, “मेरा बेटा अभी पूरे 14 साल का भी नहीं हुआ हैं। वो बच्चा है। हो सकता है थाने में डर गया हो। उसने अपनी उम्र ग़लत बता दी हो। मेरा बड़ा बेटा शाह आलम 17 साल का हैं, भला तो छोटा 18 साल का कैसे हो सकता है। मैं उनकी माँ हूँ, मुझे पता है कि मेरे बेटे कितने साल के हैं। यह भी तो हो सकता है कि पुलिस वालों ने अपनी तरफ़ से ही उसकी उम्र 18 साल लिख ली हो य़ा पिर उसे डरा धमका कर उससे ग़तल उम्र लिखवाई हो।”

बहरहास फ़िलहाल तो अमान जेल में है। कुछ समाजसेवी संस्थाओं और पीड़ितों की मदद करने आगे आए वकीलों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वो जल्द ही उनके नाबालिग़ बेटे को जेल से छुड़ा लाएंगे। दिल्ली पुलिस की इस शर्मनाक हरकत से यह अंदाज़ा ज़रूर लगाया जा सकता है कि दंगों में वो बिल्कुल भी निष्पक्ष नहीं रही। उसने हिंसा के दौरान दंगाईयों का साथ तो दिया ही अब दंगाईयों को पकड़ने के बजाय वो पीड़ितों को ही जेल मे डाल रही है। इसमें वो नाबालिग़ औ

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