रमज़ान का दूसरा जुमा : दरभंगा की तस्वीरों में देखिए

जिब्रानउदीन । Twocircles.net
रमज़ान में जुमा का शिद्दत से इंतजार किया जाता है। इसकी अपनी फ़ज़ीलते होती है। आलम यह है यह एक तरह से मिनी ईद होती है और हर एक जुमा एक खुशी लेकर आता है। मगर कोरोनाकाल के इस दौर में जुमा के दिन भी अब रौनक नही है। ऐसा लगातार दूसरे साल हो रहा है। बिहार के दरभंगा से यह कुछ तस्वीरें आपको रमज़ान के हालिया हालात से रूबरू कराती है। [caption id="attachment_442031" align="alignnone" width="247"]
"या अल्लाह, आतान तल्दी त्यों नही हो लहा?" नन्ही आलीमाह और अलीम इफ्तार के लिए आज़ान का इंतजार करते हुए।[/caption]I
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"सफाई ही आधा ईमान है" वजू के लिए खुद के चेहरे को धोता नन्हा शादमान शैख।[/caption]
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इमरान अपने घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने के लिए रोज़ा रखने के बाद भी छोटा मोटा काम कर लिया करते हैं। जब उनके पिता से हमने बात की तो उन्होंने बताया कि लॉकडॉउन की वजह से ऐसे भी घर पर मुश्किल से एक वक्त का खाना ही नसीब हो पाता है।[/caption]
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दस्तरख्वान की शान ...[/caption]
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मोहम्मद मुजम्मिल अपने रोज़ा के दौरान एक समय के लिए भी खुदा को याद करना नही छोड़ते हैं, खुदा की पाक किताब कुरान शरीफ को पढ़ते हुए।[/caption]
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" इबादतें मस्जिदों की चार दीवारों तक सीमित नहीं हैं, दरअसल हमारे लिए तो पूरी दुनिया ही एक मस्जिद है",लॉकडाउन की वजह से मस्जिदों में जा पाने पर मोहम्मद शारीक अपने परिवार वालों के साथ घर पर नमाज़ पढ़ते हुए।[/caption]
