त्रिपुरा हिंसा में वकीलों को युएपीए नोटिस, शुरू हुआ विरोध

आकिल हुसैन।Twocircles.net

त्रिपुरा में मुसलमानों के खिलाफ हुई हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट के वकीलों द्वारा जारी की गई फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट को लेकर त्रिपुरा पुलिस ने फैक्ट फाइंडिंग टीम में शामिल दो वकीलों को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम(यूएपीए)  के तहत नोटिस जारी किया है। फैक्ट फाइंडिंग टीम में शामिल सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एडवोकेट मुकेश किशोर और एडवोकेट अंसार के विरुद्ध यह नोटिस जारी किया गया हैं। त्रिपुरा पुलिस ने दोनों वकीलों को 10 नवंबर तक पूछताछ के लिए हाजिर होने का नोटिस जारी किया है।


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सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एहतिशाम हाशमी के नेतृत्व में चार वकीलों की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम त्रिपुरा के दौरे पर गई थी। टीम में एहतिशाम हाशमी के अलावा लॉयर्स फॉर डेमोक्रेसी के एडवोकेट अमित श्रीवास्तव, एडवोकेट अंसार इंदौरी सचिव, मानवाधिकार संगठन, राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन परिसंघ (एनसीएचआरओ) और अधिवक्ता मुकेश किशोर, नागरिक अधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) शामिल थे।‌ टीम ने त्रिपुरा के हिंसा प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर मुसलमानों के मस्जिद, मकान और दुकानें जलाए जाने के साक्ष्य इकट्ठा करें थे।

फैक्ट फाइंडिंग टीम ने मंगलवार को दिल्ली आकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक प्रेस कांफ्रेंस कर रिपोर्ट पेश की थी। फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि त्रिपुरा में मुसलमानों की दुकानों और मस्जिदों को कट्टरपंथी संगठनों द्वारा निशाना बनाया गया, जो कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते हुआ। फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अगर त्रिपुरा की भाजपा सरकार चाहती तो वह त्रिपुरा में मुस्लिम के खिलाफ पूर्व नियोजित हिंसा को विफल कर सकती थी, लेकिन उसने कथित तौर पर बहुसंख्यक भीड़ को खुली छूट दे दी थी।जांच टीम द्वारा तैयार रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि त्रिपुरा के 51 जगहों पर मुसलमानों पर हमला किया गया और 12 मस्जिदों में तोड़फोड़ की गई और क्षतिग्रस्त किया गया था। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भी टीम ने यही तथ्य सामने रखे थे।

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के पश्चिमी अगरतला पुलिस थाने में 3 नवंबर को फैक्ट फाइंडिंग टीम का हिस्सा रहें वकील मुकेश और अंसार के विरुद्ध यूएपीए के तहत केस दर्ज किया गया।‌ दोनों वकीलों पर गलतबयानी और दो समूहों के बीच नफरत फैलाने वाले भड़काऊ स्टेटमेंट देने का इल्जाम है।‌ अगरतला पुलिस ने यूएपीए के अलावा आईपीसी की धारा 153-ए और बी, धारा 469, धारा 503, धारा 504 और धारा 120बी के तहत भी मामले को दर्ज किया है।

अगरतला पुलिस द्वारा वकीलों को सीआरपीसी की धारा 41 के तहत जारी नोटिस में कहा गया है कि जांच के दौरान, मामले के संबंध में आपकी संलिप्तता पाई गई है, इसलिए आपसे सवाल किए जा सकते हैं ताकि मामले से संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाया जा सकें। इसके अलावा यूएपीए नोटिस में दोनों वकीलों से अनुरोध किया गया है कि वे सोशल मीडिया में आपके द्वारा किए गए / प्रसारित किए गए इन मनगढ़ंत और झूठे बयानों / टिप्पणियों को तुरंत हटा दें।

त्रिपुरा पुलिस ने कहा हैं कि बाहर के समूहों ने सोशल मीडिया पर जलती हुई मस्जिद की फर्जी तस्वीरें अपलोड करके त्रिपुरा में अशांति पैदा करने और राज्य की छवि खराब करने के लिए प्रशासन के खिलाफ साजिश रची थी। नोटिस के मुताबिक, पश्चिम अगरतला पुलिस स्टेशन में आईपीसी और यूएपीए की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, सोशल मीडिया पोस्ट को प्रसारित करना, धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक समुदायों के लोगों के बीच शांति भंग करने के लिए बयान देने के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। नोटिस में दोनों वकीलों 10 नवंबर तक पश्चिम अगरतला पुलिस स्टेशन में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।

फैक्ट फाइंडिंग टीम में शामिल रहें सुप्रीम कोर्ट के वकीलों पर यूएपीए का केस दर्ज किए जाने का विरोध शुरू हो गया है। तमाम सामाजिक संगठन, वकीलों, समाजिक कार्यकर्ताओं ने त्रिपुरा पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

फैक्ट फाइंडिंग टीम का हिस्सा रहें एडवोकेट एहतिशाम हाशमी Two Circles.net से बात करते हुए कहते हैं कि त्रिपुरा पुलिस असहमति और विरोध की आवाज़ को दबाने के लिए वकीलों को निशाना बना रहीं हैं। एहतिशाम हाशमी ने कहा कि त्रिपुरा में मुसलमानों पर हमले बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की प्रतिक्रिया में हुए थे। हिंसा तब हुई जब विश्व हिंदू परिषद ने 26 अक्टूबर को बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के खिलाफ एक विरोध रैली निकाली। उन्होंने कहा कि इस दौरान 12 मस्जिदों पर हमला हुआ। दक्षिण त्रिपुरा में स्थित दरगाह बाजार मस्जिद में दंगाइयों ने कुरान जलाई और 9 दुकानों और 3 घरों को हानि पहुंचाई गई।

फैक्ट फाइंडिंग टीम ने इस हिंसक घटना पर सरकार से 8 मांगे रखी थी। इस घटना के कारण जिन लोगों के व्यवसाय को आर्थिक नुकसान हुआ है, उन्हें राज्य सरकार द्वारा उचित मुआवजा मिलना चाहिए. साथ ही आगजनी और तोड़फोड़ में क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों को दोबारा बनाया जाए जिसके लिए सरकार पैसा दे, और आपत्तिजनक नारे लगाने वाले लोगों और संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

ज्ञात रहे कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका में दुर्गा पूजा पंडाल में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप को लेकर हिंसा हुई थी। इस हिंसा में कई लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हो गए थे। बांग्लादेश में हुई हिंसा के विरोध में हिंदूवादी संगठनों ने त्रिपुरा में रैलियां निकालीं। रैलियों के दौरान हिंदूवादी संगठनों द्वारा हिंसक रूप ले लिया गया। त्रिपुरा के आठ में से करीब पांच जिले हिंसा की चपेट में आए जिसमें सिपाहीजाला, गोमती, उनाकोटी, वेस्ट त्रिपुरा, नॉर्थ त्रिपुरा शामिल हैं। हिंसा के दौरान अल्पसंख्यक मुसलमानों को निशाना बनाया गया।

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