Indian Muslim




‘बीजेपी के लोग क़तार में क्यों नहीं, हो इसकी सीबीआई जांच’

अफ़रोज़ आलम साहिल, TwoCircles.net

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नोटबंदी को लेकर पीएम मोदी के ज़रिए लिए गए फैसले का भले ही हर सभा में तारीफ़ की पुल बांध रहे हों, लेकिन उनकी सरकार के मंत्री नोटबंदी के इस फैसले पर उनके साथ खड़े नज़र नहीं आ रहे हैं.

TwoCircles.net के साथ एक ख़ास बातचीत में बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल गफ़ूर ने कहा है कि –‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के साथ गद्दारी किया है. उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव के मद्देनज़र अपने विरोधियों को कमज़ोर और अपने पार्टी के लोगों को मज़बूत करने के मक़सद से नोटबंदी का फ़ैसला किया है.’

Panama papers probe going on 'very seriously', government tells SC

New Delhi : The Union government on Thursday told the Supreme Court that it has set-up a Multi-Agency Group (MAG) to investigate people whose names surfaced in Panama Papers leaks as having overseas accounts and was taking the entire matter "very seriously".

Additional Solicitor General Tushar Mehta told the bench of Justice Dipak Misra and Justice Amitava Roy that the MAG has already submitted five reports to the court-appointed SIT probing the black money stashed abroad.

बिजनौर में बन रही है बसपा की दलित-मुस्लिम एकता की नर्सरी

आस मोहम्मद कैफ, TwoCircles.net

बिजनौर: दलितों की देवी के तौर पर प्रचार पाने वाली मायावती ने अपना पहला चुनाव बिजनौर लोकसभा से लड़ा था. उनका सामना रामविलास पासवान और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से था. दलितों के सबसे बड़े नेता बाबू जगजीवन राम की बेटी होने का लाभ लेते हुए कांग्रेस की मीरा कुमार यह चुनाव जीत गयी थीं.

SP’s Ghazipur rally shows glaring division; Ansari brothers join party despite Akhilesh’s protests

By Faisal Fareed, TwoCircles.net

While Samajwadi Party began its election campaign officially by organizing a mammoth rally at Ghazipur on Wednesday, the party witnessed two major transformations: Mukhtar Ansari’s Qaumi Ekta Dal officially became a part of the SP and another son rose in the party with Aditya Yadav, the son of Shivpal Yadav taking centerstage in absence of Chief Minister Akhilesh Yadav.

नोटबंदी के बहाने मोदी के पाले में जाते सीएम नीतीश!

अफ़रोज़ आलम साहिल, TwoCircles.net

नोटबंदी के बहाने बिहार की ज़मीन पर एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम अंगड़ाई लेता नज़र आ रहा है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में खड़े हो गए हैं. कभी मोदी के कटू आलोचक रहे नीतिश कुमार हर दूसरे दिन अपने संबोधन में नोटबंदी की शान में क़सीदे पढ़ते नज़र आ रहे हैं. यहां तक कि इस नोटबंदी की वजह से भीषण समस्या झेल रहे देश भर के मजदूरों और किसानों से भी उनकी सहानुभूति नज़र नहीं आ रही है.

Signature campaign against UCC in Kuwait by Tamil Islamic associations

By TCN News

A signature campaign has been started by the Kuwait Tamil Islamic Committee (K-Tic) with Federation of All Kuwait Tamil Islamic Associations with thousands of Indian Muslims, including non-Muslims in Kuwait.

मोदी जी आपका तो रोम-रोम कारपोरेट के यहां गिरवी है

महेंद्र मिश्र

आगरा की रैली में पीएम मोदी ने कहा कि वो बिकाऊ नहीं हैं. यह बात उतनी ही असत्य है जितना यह कहना कि सूरज पश्चिम से निकलता है. जो व्यक्ति बाजार की पैदाइश है और जिसकी कारपोरेट ने खुलेआम बोली लगाई हो, उसके मुंह से यह बात अच्छी नहीं लगती है. शायद मोदी जी आप उस वाकये को भूल गए जब कारपोरेट घरानों के नुमाइंदों का लोकसभा चुनाव से पहले अहमदाबाद में जमावड़ा हुआ था. इसमें अंबानी से लेकर टाटा और बजाज से लेकर अडानी तक सारे लोग मौजूद थे.

Demonetisation – A Festival of Honesty; but where are the Laddoos?

By Arif Khan for TwoCircles.net

November and December are the busiest months of the year for weddings: an atmosphere of festivities full of delicious food and mouth-watering sweets. I confess, I am a sucker for Indian sweets. A festive occasion is never complete in India without the king of sweets – the “Laddoo”.

For the past two weeks, however, the entire nation has been celebrating a totally different occasion: the “festival of honesty” as declared by the Minister of State for Power.

मंदिर के लिए मुस्लिम समुदाय ने दी कब्रिस्तान की ज़मीन

अशफाक कायमखानी

सीकर: राजस्थान के शेखावटी जनपद के सीकर शहर से कुछ दूरी पर स्थित कोलिड़ा गांव के मुसलमानों ने पुराने कब्रिस्तान की डेढ़ बीघा जमीन को गांव में मौजूद पुराने मंदिर 'माता सुरजमल परिसर' के विस्तार के लिए हिन्दू समुदाय को भेंट कर दिया. इसके लिए पंचायत में बाकायदा लिखापढ़ी का सहारा लिया गया.

क्‍या ये ‘मानसिक आपातकाल’ है?

नासिरूद्दीन

हम सब आज जिस दौर में रह रहे हैं, क्‍या उसे सामान्‍य कहा जा सकता है? कहीं हम लगातार खास तरह के तनाव या डर या खौफ के साए में तो नहीं जी रहे हैं? क्‍या हम ‘मानसिक आपातकाल’ के दौर में जी रहे हैं? आइए इस सवाल की पड़ताल करते हैं.

हम सबने ध्‍यान दिया होगा, जब अचानक कुछ होता है तो दिमाग हमें तुरंत अलर्ट करता है. जैसे - कोई मारने के लिए हाथ उठाता है तो हम झटके से बचने की कोशिश करते हैं या उसका हाथ पकड़ लेते हैं. या कोई हिंसक जानवर हमारी ओर दौड़ता है तो हम अपने आप बचने के लिए मुस्‍तैद हो जाते हैं. कई बार किसी अनहोनी के डर की चेतावनी भी हमें मिल जाती है.

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