इनोवेशन | एक माह में सोलर बाइक बनाने वाले असद की कहानी

असद सात सीटर बाइक बनाते हुए

फिल्म देखकर सात सीटर सोलर बाइक बनाई, आईआईटी कानपुर से बुलावा

यह कहानी है 23 वर्ष के असद की, जो बचपन से ही काफी इनोवेटिव है। उसने हाल ही में सात सीटर सोलर बाइक बनाई है। उसके प्रयोग को देखकर आईआईटी कानपुर ने उसे बुलाया है। अगर असद का आइडिया पसंद आईआईटी कानपुर को पसंद आता है तो उसे अपने प्रोडक्ट को बेहतर बनाने के लिए आर्थिक मदद मिलेगी। असद का सपना सोलर प्लेन बनाने का भी है…


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मोहम्मद ज़मीर हसन|twocircles.net

यूपी के आजमगढ़ में रहने वाले असद अब्दुल्ला 23 साल के हैं। इस उम्र में उन्होंने सात सीटर बाइक बनाई है। इस बाइक की खासियत यह है कि यह सोलर पैनल से चलती है। इसमें एक बैटरी भी लगी है, लेकिन इन बैटरियों का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब धूप न हो। यह बाइक करीब 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है। इन्हीं कामों को देखते हुए असद अब्दुल्ला को पिछले हफ्ते आईआईटी कानपुर से फोन आया है। असद के काम को देखते हुए आईआईटी कानपुर ने उन्हें यहां आने और अपने काम में सुधार करने के लिए आमंत्रित किया है। बता दें, असद के लिए ये सफर आसान नहीं था क्योंकि असद एक सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। असद बचपन से ही छोटी-छोटी चीजें बनाता था। लेकिन 2017 से नई चीजें बनाकर यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने लगे। असद के काम को बहुत जल्द सराहना मिलने लगी। इसी से प्रेरित होकर असद की दिलचस्पी इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ी।

पेट्रोल के दाम बढ़े तो सोलर से चलने वाली बाइक बनाने का आइडिया आया

असद 8 वर्ष की उम्र से ही इनोवेशन करते आ रहे हैं। जब इनकी उम्र 13 साल थी, तब इन्होंने रिमोट वाली कार की बैटरी से टुल्लू मोटर बनाया था। आने वाले समय में सोलर एनर्जी और बैटरी से चलने वाला प्लेन बनाने का सपना है। इसे बनाने में करीब डेढ़ साल का समय लग जाएगा।’ सात सीटों वाली बाइक बनाने का आइडिया कैसे आया? इस सवाल के जवाब में असद कहते हैं कि अजय देवगन की फिल्म ‘गोलमाल’ देखकर लगा कि ऐसी बाइक बनानी चाहिए।
असद ने टू सर्किल से बात करते हुए कहा, “जिस तरह से डीजल और पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं, उससे आम आदमी के लिए काफी मुश्किल हो रही है। लोगों की परेशानी को देखकर मेरे मन में विचार आया कि क्यों न ऐसी चीज बनाई जाए, जिससे लोग एक जगह से दूसरी जगह कम खर्च में जा सकें। काफी सोचने पर यह बाइक बनाने का विचार मन में आया। फिर मैंने इस पर काम करना शुरू कर दिया। इस बाइक को बनाने में एक महीने का समय लगा। बाइक को बनाने में करीब 12 हजार रुपए खर्च आया। बनने के बाद 8-10 रुपए के खर्च में यह बाइक पूरी तरह से चार्ज हो जाती है, फिर 150 किलोमीटर तक चलती है।

आगे खुशी जाहिर करते हुए कहते हैं, ”आईआईटी कानपुर की तरफ से कॉल आया था। मैं आईआईटी कानपुर जाऊंगा और वहां अपने प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से बात करूंगा।” असद एक ऐसी सोलर बाइक बनाना चाहते हैं जो मजबूत और सस्ती हो। गरीब, ग्रामीण इलाके के लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकें।

आईआईटी कानपुर इनोवेशन और इन्क्यूबेशन सेंटर ने असद को बुलाया

आईआईटी कानपुर में स्थित इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर देश के उन प्रतिभाशाली बच्चों की मदद करता है जो कुछ नया और अनोखा बनाने के बारे में सोचते हैं। आईआईटी कानपुर में 14 कार्यक्रम हैं जिसके तहत यह प्रतिभाशाली छात्रों की मदद करता है। इन कार्यक्रमों के तहत 3 लाख से 3 करोड़ तक की राशि प्रदान की जाती है।
टू सर्कल से बात करते हुए, आईआईटी कानपुर इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर के सहायक प्रबंधक, ऋषभ पांडे ने कहा, “हमने असद को प्रक्रिया को समझने और अपने विचार को पेश करने के लिए यहां आने के लिए बुलाया है। हम आइडिया को पिच करने में उनकी मदद करेंगे। अगर आइडिया पसंद आया तो हम उन्हें 3-7 लाख तक की मदद मुहैया करा सकते हैं। असद का काम प्रोटोटाइप की श्रेणी में आता है।इसके तहत हम 7 लाख तक की राशि देते हैं और कैंपस के अंदर काम करने की जगह भी देते हैं।”

असद के पिता को उम्मीद है कि उनका बेटा देश और राज्य का नाम रोशन करेगा

असद के पिता मोहम्मद अब्दुल्ला ने बताया कि मेरा बेटा असद बचपन से ही टेक्निकल माइंड का है। वह बचपन से ही नई-नई चीजें बनाता रहता है। अब उसने एक ऐसी बाइक बनाई है, जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है। इससे परिवार और आस-पास के लोग बहुत खुश हैं। सब कह रहे हैं कि बेटा आगे बढ़ रहा है। निश्चित रूप से आने वाले समय में मेरा बेटा प्रदेश और देश का नाम रोशन करेगा। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा, कानपुर जैसी संस्थाओं से असद को कॉल आना हम सभी के लिए गौरांवित पल है। असद उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे मुबारकपुर लोहरा का निवासी हैं। इन्होंने आईटीआई और बीसीए तक की पढ़ाई की है।

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