‘शाहिद आज़मी और रोहित वेमुला की हत्या लोकतंत्र की हत्या है’

TwoCircles.net News Desk

लखनऊ : ‘शाहिद आज़मी और रोहित वेमुला की हत्या लोकतंत्र की हत्या है, जिसे लोकतंत्र विरोधी हमारी व्यवस्था ने अंजाम दिया है. इसलिए ऐसी शहादतें लोकतंत्र पसंद अवाम के लिए संकल्प का समय होती हैं.’


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ये बातें आज लखनऊ के जयशंकर प्रसाद हॉल में शाहिद आज़मी की 6वीं शहादत दिवस के अवसर पर रिहाई मंच द्वारा आयोजित कायक्रम ‘इंसाफ़ के लिए संघर्षरत दोस्तों की मुलाक़ात’ में एडवोकेट शुऐब ने शाहिद आज़मी व रोहित वेमुला को एक साथ याद करते हुए कहा.

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इस अवसर पर रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि –‘रिहाई मंच के इस आयोजन से हमने यह संकल्प लिया है कि शाहिद और रोहित की शहादतें बेकार नहीं जाने दी जाएंगी. लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा हर क़ीमत पर की जाएगी.’

रिहाई मंच आज़मगढ़ प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने कहा कि –‘जो खुफिया एजेंसियां और सरकारें हमारे जिले आज़मगढ़ के मुस्लिम युवकों पर आरोप लगा रही हैं कि वो आईएस के नाम पर लड़ते हुए सीरिया और ईराक में मारे जा रहे हैं, उनके मुंह पर संवैधानिक मूल्यों पर संघर्षरत शाहिद आज़मी की शहादत तमाचा है. जिसकी हत्या खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की साजिश का नतीजा था.’

उन्होंने कहा कि –‘आज रोहित वेमुला जैसे नौजवान जो कि याकूब मेमन की फांसी और दलितों के उत्पीड़न पर सवाल उठाते थे, उन्हें जिस तरह से आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा, वो हमारी पूरी व्यवस्था के इंसाफ़ विरोधी चरित्र को उजागर करता है.’

इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि –‘इंसाफ़ के लिए चलाया जा रहा रिहाई मंच का आंदोलन इंसाफ़ के सवाल को राजनीति का केन्द्र बिन्दु बनाने की क्षमता रखता है. इसलिए इंसाफ़-पसन्द अवाम के बीच इस आंदोलन का आकर्षण तेज़ी से बढ़ा है और लोग इंसाफ़ के सवाल पर राजनीतिक दलों से सवाल पूछने लगे हैं.’

आगे उन्होंने कहा कि –‘आज जब आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों पर और जाति के नाम पर दलितों के ऊपर सत्ता संरक्षित हमले बढ़े हैं, तब यह ज़रूरी हो जाता है कि लोग अपनी दल-गत सीमाओं से उठकर इंसाफ़ के इस अभियान को निर्णायक दिशा दें.’

इस कार्यक्रम में गोण्डा से आए रिहाई मंच नेता रफीउद्दीन ने कहा कि –‘आज मुस्लिम युवा घर से निकलने से डरने लगा है कि कब उसे कहीं से उठाकर किसी फर्जी मुक़दमें में न फंसा दिया जाए. रिहाई मंच गांव-क़स्बे तक पहुंचकर इस दहशत को ख़त्म कर लोकतंत्र को मज़बूत बनाएगा.’

सिद्धार्थनगर से आए डा. मज़हर ने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों ने देश को आतंरिक तौर पर कई टुकड़ों को बांट दिया है. आज ज़रुरत लोगों को जोड़ने की है.

फैज़ाबाद से आए अतहर शम्सी ने कहा कि जिस तरह से चुनाव की आहट होते ही मुस्लिमों पर हमले बढ़ जाते हैं, वो साफ़ करता है कि वोटों के ध्रुवीकरण के लिए ऐसा राजनीतिक दल करते हैं. आगामी समय में चुनाव फिर होना है, ऐसे हमें यह तय करना होगा कि अब कोई अख़लाक न मारा जाए.

उन्नाव से आए ज़मीर ख़ान ने कहा कि ने कहा कि –‘पिछले दिनों मुलायम सिंह ने बयान दिया था कि अगर प्रधानमंत्री कहेंगे तो मैं मुज़फ्फ़रनगर और दादरी के हत्यारों का नाम बता दूंगा. सवाल उठता है कि मुलायम सिंह इस सूबे की जनता और देश के संविधान के प्रति जवाबदेह हैं या उस नरेन्द्र मोदी के, जो आरएसएस के एजेण्डे को बढ़ाने के लिए 2002 में मुसलमानों का क़त्लेआम करा चुके हैं.’

बलिया से आए बलवंत यादव ने कहा कि –‘जब तक बांटो और राज करो की सियासत का खात्मा नहीं होता, तब तक इस देश की अवाम मरती रहेगी. आज ज़रूरत इंसाफ़ के सवाल पर पूरे समाज को लेकर राजनीतिक पहल करने की है.’

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‘इंसाफ़ के लिए संघर्षरत दोस्तों की मुलाक़ात’ का संचालन राजीव यादव ने किया. जिसमें मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय, मुरादाबाद से सलीम बेग, गोण्डा से आए अब्दुल हादी, डा. एम. डी. खान, रफ़त फ़ातिमा, ताहिरा हसन, रामकृष्ण, के.के. शुक्ला, आदियोग, बलिया से जय प्रकाश मौर्या, बांदा से धनंजय चौधरी, जैद अहमद फारुकी, फ़रीद खान, लक्ष्मण प्रसाद, अमित मिश्रा, दिनेश चौधरी, फ़तेहपुर से संजय विद्यार्थी, उन्नाव से संजीव श्रीवास्तव, प्रतापगढ़ से आए शम्स तबरेज़ खान, मोहम्मद हाफिज़, मोहम्मद कलीम, शरद जायवाल, गुंजन सिंह, गाजीपुर से तुफैल खान और सरताज खान, पीसी कुरील, अख्तर, मो. मसूद, वसी, सीमा चंन्द्रा, आलोक, जाहिद अहमद, जुहैर तुराबी, फैजान मुसन्ना, मऊ आईमा से आए मोहम्मद उमर, शाहनवाज़ आलम, अनिल यादव, शबरोज़ मुहम्मदी, शकील कुरैशी, लक्ष्मण प्रसाद, खालिद सिद्दीकी आदि ने शिरकत की.

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