आज सहारनपुर में दलित महापंचायत, प्रशासन ने लगाया धारा —144

आस मोहम्मद कैफ़, TwoCircles.net

सहारनपुर : शुक्रवार को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में हुए जातीय संघर्ष के बाद अब दलितों ने अपने पंचायत का ऐलान कर दिया है. ये पंचायत मंगलवार को सहारनपुर-देहरादून मार्ग पर स्थित रविदास छात्रावास में तय की गई है.


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इस पंचायत के आयोजन का ज़िम्मा यहां के युवा दलित नेता चंद्रशेखर ने लिया है. चंद्रशेखर एक चर्चित दलित नेता हैं और युवा दलितों के संगठन भीम आर्मी के अध्य्क्ष हैं. भीम आर्मी इस इलाक़े का एक बड़ा संगठन है, जिसमें 10 हज़ार से अधिक दलित युवा हैं. यानी प्रदेश भर में दलित युवाओं का यह सबसे मज़बूत दल है.

चंद्रशेखर ने TwoCircles.net के साथ बातचीत में बताया कि उन्होंने एसएसपी सहारनपुर सुभाष चंद्र दुबे को पत्र भेजकर पंचायत की अनुमति मांगी है. लेकिन अनुमति अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है. अगर वो इस पंचायत के लिए अनुमति नहीं भी देते हैं, हम तब भी पंचायत करेंगे.

चंद्रशेखर के मुताबिक़ उनको लगभग सभी संस्थाओं ने अपना समर्थन दे दिया है. इस पंचायत के लिए युवा नेता राहुल भारती समेत तमाम दलित चेहरे पंचायत के लिए भीड़ जुटाने में जुट गए हैं. सोमवार को दिन भर इसके लिए दलित बहुल गाँवों में जनसंपर्क किया गया.

Twocircles.net के साथ बातचीत में चंद्रशेखर ने बताया कि वो पुलिस के कामकाज से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं. पुलिस रजनीतिक दबाव में है. दलितों के घर में घुसकर हज़ारों की भीड़ ने बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों से मारपीट की और घरों में आग लगा दी, लेकिन अब तक कोई मुआवज़ा नहीं दिया गया और न ही हमलावरों की गिरफ़्तारी ही की जा सकी है. यह सरासर अन्याय है. दलितों की सुनवाई नहीं हो रही है.

चंद्रशेख़र के मुताबिक़ इस दलित पंचायत में 10 हज़ार से अधिक लोगों की भीड़ जुटने की सम्भवना है.

हालांकि स्थानीय क्षेत्राधिकारी अब्दुल क़ादिर बताते हैं कि, पूरे जनपद में धारा-144 लागू है. ऐसे में कोई पंचायत कैसे कर सकता है.

बताते चलें कि ठीक एक साल पहले 2016 के अप्रैल महीने के आख़िर में सहारनपुर के ही नानौता क्षेत्र व उसके बाद गांव घड़कौली में दलित-ठाकुरों के बीच जातीय संघर्ष हुआ था. इस संघर्ष का मुख्य कारण अंबेडकर प्रतिमा पर कालिख पोतना रहा था. तब ठाकुरों ने पहल करते हुए महापंचायत का आयोजन किया था. इस महापंचायत में ठाकुर नेताओं ने प्रशासन और विरोधी पक्ष को चेतवानी देते हुए कहा था कि ‘राजपूतों के सब्र का इम्तहान न लिया जाए और खान्ग्रेसी टुकड़ों पर पलने वाली भीम आर्मी पर तत्काल रोक लगाई जाए.’ अब इस बार ये पहल खुद भीम आर्मी ने ही किया है.

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