देशभर में आग लगाने वाली नुपूर शर्मा को अदालत ने क्या कहा ! पढिये पूरी बात

जिब्रानउद्दीन।Twocircles.net

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का पैगंबर मुहम्मद के बारे में उनकी टिप्पणी के लिए भारी फटकार लगाई है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने कड़े शब्दों में कहा कि शर्मा पूरे भारत में लगे नफरत की आग के लिए अकेले जिम्मेदार हैं और उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। इस आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण अबतक देश के कई राज्यों में हिंसक विरोध और दंगे हुए हैं।


Support TwoCircles

पिछले महीने की शुरुआत में एक टीवी डिबेट के दौरान नुपुर शर्मा की आपत्तिजनक टिप्पणी से भारत में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था, साथ ही कई गल्फ देशों द्वारा भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए देखा गया था। हाल ही में, मंगलवार को, उदयपुर में एक दर्जी की भी नूपुर शर्मा का समर्थन करने की वजह से, दो लोगों द्वारा हत्या कर दी गई थी। अदालत शर्मा द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, “जिस तरह से उसने देश भर में भावनाओं को प्रज्वलित किया है। देश में जो हो रहा है उसके लिए यह महिला अकेले जिम्मेदार है।”

कोर्ट ने आगे कहा, “वह वास्तव में एक ढीली ज़बान है, उन्होंने टीवी पर सभी प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए हैं और पूरे देश में आग लगा दी। फिर भी, वह 10 साल से वकील होने का दावा करती है। उसे तुरंत, पूरे देश से, अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांगनी चाहिए।”

नूपुर शर्मा के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने एक लिखित माफी मांगी थी, जिस पर न्यायमूर्ति कांत ने टिप्पणी की, कि “माफी मांगने में बहुत देर हुई थी”, और कहा कि वह भी, सशर्त रूप से किया गया था, यह कहते हुए कि भावनाओं को ठेस पहुंची है।

“एनवी शर्मा” के नाम से दायर याचिका में, निलंबित भाजपा नेता ने दावा किया था कि उनकी टिप्पणियों का वीडियो गलत तरीके से बनाया गया और असामाजिक तत्वों द्वारा साझा किया गया था। इधर याचिका पर “भ्रामक नाम” पर सवाल किए जाने पर, नूपुर शर्मा के वकील ने कहा कि उन्होंने धमकियों के कारण अपने नाम का इस्तेमाल नहीं किया था। जिस पर न्यायाधीशों ने कहा, “उन्हें खतरा है या वो खुद सुरक्षा की दृष्टि से खतरा हो गई हैं?”

पीठ ने उस डिबेट शो, जिसमें शर्मा ने विवादास्पद टिप्पणी की थी, की एंकर के लिए टेलीविजन चैनल पर भी कड़ा रुख अपनाया, कोर्ट ने पूछा, “टीवी पर बहस किस लिए थी? केवल एक एजेंडा को बढ़ावा देने के लिए? उन्होंने एक विचाराधीन विषय क्यों चुना।” ज्ञात हो कि बहस ज्ञानवापी मामले पर थी जो वर्तमान में न्यायालय के समक्ष लंबित है।

अदालत ने “समान व्यवहार” और “कोई भेदभाव नहीं” पर नूपुर शर्मा की दलील को भी खारिज कर दिया। न्यायाधीशों ने कहा, “जब आप दूसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करते हैं, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता है, लेकिन जब यह आपके खिलाफ है, तो किसी ने आपको छूने की हिम्मत नहीं की।” कोर्ट ने आगे कहा, “तो क्या हुआ अगर वह एक पार्टी की प्रवक्ता हैं? वह सोचती है कि उसके पास सत्ता का बैकअप है और वह देश के कानून का सम्मान किए बिना कोई भी बयान दे सकती है ?”

न्यायाधीशों ने कहा, “ये टिप्पणियां बहुत परेशान करने वाली और इसमें से अहंकार की बू आती हैं। इस तरह की टिप्पणी करने का उनका क्या काम है? इन टिप्पणियों से देश में दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं … ये लोग धार्मिक नहीं हैं। वे दूसरे धर्मों के लिए सम्मान नहीं रखते हैं। ये टिप्पणियां सस्ते प्रचार या राजनीतिक एजेंडे या कुछ अन्य नापाक गतिविधियों के लिए की गई थीं।”

शर्मा वकील ने कहा कि उसने टीवी पर डिबेट शो के दौरान केवल एंकर के एक सवाल का जवाब दिया था। कोर्ट ने जवाब दिया कि “ऐसी सूरत में एंकर के खिलाफ भी मुकदमा चलना चाहिए।”

जब शर्मा के वकील ने नागरिकों को बोलने का अधिकार का हवाला दिया तो न्यायाधीशों ने सावधानी से जवाब दिया, “लोकतंत्र में, सभी को बोलने का अधिकार है। लोकतंत्र में घास को उगने का अधिकार है और गधे को उसे खाने का अधिकार है।एक लोकतंत्र में लोगों को स्वंत्रता है, लेकिन थोड़ा नियंत्रण होना चाहिए, नूपुर शर्मा की टिप्पणी ने लोगों को देशभर में भड़का दिया।” कोर्ट ने कहा।

पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा के बारे में एक पिछले आदेश का हवाला देने की दलील भी नूपुर शर्मा की नहीं चली, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “उनकी तुलना एक पत्रकार से नहीं की जा सकती, जब वो किसी न्यूज डिबेट में जाकर बहस करती हैं और उनके द्वारा बोले गए शब्दों का समाज पर प्रभाव और परिणामों के बारे में सोचे बिना गैर ज़िम्मेदाराना बयान देती हैं।”

SUPPORT TWOCIRCLES HELP SUPPORT INDEPENDENT AND NON-PROFIT MEDIA. DONATE HERE