संसद को किसी पर धर्म लादने का अधिकार नहीं – बिहार राज्यपाल रामनाथ कोविंद

TCN News

गया(बिहार): ये विचार आज यहाँ मगध विश्वविद्यालय के डा. राधाकृष्णन सभागार में ‘अंतर-धार्मिक सद्भाव का महत्व: मानवता के लिए उसके निहितार्थं’ विषय पर इंस्टीट्यूट आॅफ आब्जेक्टिव स्टडीज, नई दिल्ली तथा मगध विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग एवं दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. अंतिम दिन समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में बिहार के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति, श्री रामनाथ कोविन्द ने व्यक्त किए. उन्होंने कहा,’मानवीय संवेदना से जिसका सम्बंध नहीं है वह धर्म कदाचित नहीं हो सकता. सभी धर्मों का उद्देश्य भावना और विचार से मानवीय कल्याण है’.


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श्री कोविंद ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा छः धर्मों पर प्रकाशित पुस्तिका में ‘आई’ का विशिष्ट महत्व है क्योंकि उसका महत्व स्वयं की पहचान से है. उन्होंने कहा कि सभी छः धर्मों यथा हिन्दू धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म, इस्लाम धर्म, ईसाई धर्म में ‘आई’ समान है इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि सभी धर्मों में समानता है जो राष्ट्रीय एकता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

रामनाथ कोविंद

उन्होंने लोगों को सचेत किया कि धार्मिक अतिवाद देश की एकता के लिए खतरनाक है.

राज्यपाल ने कहा कि भारत के संविधान ने सभी देशवासियों को अपने-अपने धर्मों का अनुसरण करने का अधिकार दिया है. इस सम्बंध में बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर ने कहा था कि धर्म को विज्ञान की तरह चलना होगा. धर्म और मर्यादा का पालन कर ज्ञान प्राप्त किया जाए. संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 27 और 28 में यह स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि राज्य धर्म निरपेक्ष होगा और धर्मं के अधार पर किसी के साथ पक्षपात नहीं किया जाएगा. यहां तक कि संसद को किसी पर धर्म विशेष लादने का अधिकार नहीं है.

इस संबंध में उन्होंने हिन्दी के कवि रामधारी सिंह दिनकर का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति चींटियों द्वारा एकत्र किये गये अन्न के कणों की तरह नहीं बल्कि मधुमख्खी के शहद की तरह है जिससे सभी लाभान्वित हो सकें. उन्होंने कहा कि भारत में धार्मिक विविधता है और यही इसकी शक्ति है. यहां कटुता के लिए कोई स्थान नहीं है.

उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी में जो विचार आये है वे नए नहीं है क्योंकि इससे पहले निर्गुण सम्प्रदाय तथा सूफी संतों ने धार्मिक सहिष्णुता, प्रेम और भाईचारे की बात कही थी लेकिन आज आवश्यकता इस बात की है कि विभिन्न सम्प्रदायों के बीच समझ पैदा हो और संवाद स्थापित हो.

उन्होंने ये भी कहा कि आम आदमी को भी धार्मिक एकता का महत्व समझाने और उसे दुराग्रह से बचाने की जरूरत है. संवाद की जरूरत केवल दो धर्मों के बीच ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के बीच करने की जरूरत है.

मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मो. इश्तियाक ने अपने संबोधन में कहा कि छः धर्मों के धर्म गुरूओं की उपस्थिति तथा उनके विचारों से गोष्ठी की उपयोगिता बढ़ी है. इस तरह की संगोष्ठी आयोजित करने की प्रेरणा उन्हें राज्यपाल से मिली जो बराबर इसकी जानकारी प्राप्त करते रहे. उन्होंने कहा कि इस गोष्ठी में आये विचार अमन, शान्ति और सद्भाव का संदेश दूर-दूर तक पहुँचायेंगे. गोष्ठी में विभिन्न धर्मों से जुड़े धर्माचायों के अतिरिक्त देश के विभिन्न भागों से आये विशेषज्ञों ने भाग लिया.

आईओएस के चेयरमैन डा. मो. मंज़ूर आलम ने सेमिनार के गंतव्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रदेश में सोचने समझने वाले दिमाग, सामाजिक परिवर्तन पर नजर रखने वाले और बुद्धिजीवी इस बात का प्रयास करें कि धार्मिक विवाद और ठकराव से बचने के लिए कुछ नये गंभीर प्रयास कर सकें. वे एक ऐसी जंजीर बनाये जिसकी कड़ियां मजबूत हो ताकि वे देश को कमजोर न कर सकें.

सेना मुख्यालय दिल्ली के लेफ्टिनेंट जनरल आर. के. शर्मा ने संगोष्ठी की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए यह सुझाव दिया कि धर्म की गलत व्याख्या न हो इसके लिए प्राइमरी स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को सर्वधर्म की शिक्षा और सभी धर्मों का सम्मान करने की शिक्षा दी जाए. उन्होंने कहा कि काॅमिक्स और कार्टून का बच्चों में वितरण किया जाए ताकि सर्वधर्म सद्भाव की भावना को मजबूती प्रदान की जा सके.

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