कासगंज: पढ़िए! हीरो बन गए अकरम और राहुल की कहानी

आस मुहम्मद कैफ़, TwoCircles.net 

कासगंज : कासगंज में नफ़रत फैलाने वालों ने तो आग लगाने में अब तक कोई कसर नहीं छोड़ी है, मगर क़ुदरत भी अक्सर मोहब्बत के रहनुमा भेज ही देती है.


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इस बार फिर ऐसा ही हुआ है. दो युवकों ने आपसी भाईचारे की शानदार मिसाल क़ायम की है. इससे दुनिया को यह संदेश जाता है कि यहां अभी इंसानियत ज़िन्दा है.

ख़ास बात यह है कि इन दोनों ही युवकों को दंगे में मरा हुआ घोषित कर दिया गया था. मगर दोनों लौट आएं और नफ़रत फैलाने वालों को ज़ोरदार जवाब दिया है. इनमें से एक का नाम मोहम्मद अकरम है और दूसरे का नाम राहुल उपाध्याय.

गणतंत्र दिवस के दिन कासगंज में हुए बवाल के बाद चंदन गुप्ता के साथ एक और युवक राहुल उपाध्याय के मौत की ख़बर भी सोशल मीडिया पर प्रचारित की जा रही थी. कल यह युवक खुद आईजी अलीगढ़ के दफ़्तर में लौट आया.

दूसरे युवक मोहम्मद अकरम की भी सोशल मीडिया में गोली लगने की अफ़वाह के बाद मरने की ख़बर फ़ैलाई गई. लेकिन अकरम ने खुद मीडिया को बुलाकर इसका खंडन किया.

लेकिन बात बस इतनी नहीं है. इन दोनों ने ही दंगाईयों को क़रारा जवाब दिया है. अकरम ने खुद की जान लेने की कोशिश करने वालों को माफ़ कर दिया है तो राहुल ने दंगाइयों को उसका नाम इस्तेमाल कर अफ़वाह फैलाने वाले चार युवकों को जेल भिजवा दिया है. इन दोनों युवकों की उनकी इस पहल के लिए खूब तारीफ़ हो रही है.

दरअसल, इस ‘हादसे’ में अकरम की एक आंख चली गई है. बावजूद इसके अकरम ने खुद पर हमला करने वालों को मीडिया के सामने माफ़ करने का ऐलान कर दिया और कोई रिपोर्ट नहीं लिखाई. अकरम को इसके लिए बहुत सराहा जा रहा है. वहीं  दूसरी तरफ़ राहुल उपाध्याय ने सोमवार को खुद आईजी के दफ़्तर में आकर बता दिया कि वो ज़िन्दा है. उसके मरने की अफ़वाह दंगाई अपने फ़ायदे के लिए फैला रहे हैं. राहुल ने उसका नाम लेकर अफ़वाह फैलाने वाले चार लोगों को गिरफ्तार भी करवाया.

राहुल TwoCircles.net के साथ बातचीत में बताते हैं कि, इलाक़े में इंटरनेट सेवा बंद हो गई. मेरे गांव में वैसे भी सिग्नल नहीं आते. कर्फ्यू की वजह से शहर आने का मतलब नहीं बन पा रहा था. किसी रिश्तेदार का फोन आया कि व्हाट्सप और फेसबुक पर मैं मर गया हूं. किसी ने सलाह दी कि कुछ दिन छिप जाओ. मुआवज़ा मिल जाएगा, मगर मेरा ज़मीर नहीं माना. मुझे मरा बताकर माहौल ज़हरीला किया जा रहा था. समाज के प्रति मेरी भी ज़िम्मेदारी है और फिर मैं आईजी साहब के यहां पहुंच गया. मैं अमन चैन चाहता हूं.

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