शेरदिल भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी अफगानिस्तान में शहीद

न्यूज डेस्क। Twocircles.net

भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी शुक्रवार को अफगान सुरक्षा बल और तालिबानी लड़ाकों के बीच चल रहे मुठभेड़ की कवरेज करते समय मारे गए। पुलित्जर पुरस्कार विजेता रह चुके सिद्दीकी पिछले कुछ दिनों से रॉयटर्स के लिए अफगान-तालिबान के संघर्ष को कवर कर रहे थे। उनके असामयिक मौत से अंतराष्ट्रीय स्तर पर शोक की लहर दौड़ गई है, साथ ही पत्रकारिता जगत को भी एक बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा है।


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एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगान स्पेशल फोर्स, कंधार जिले में स्पिन बोल्डक के मुख्य बाजार क्षेत्र पर फिर से कब्जा करने के लिए लड़ रही थी। जिस दौरान सिद्दीकी और उनके साथ एक वरिष्ठ अफगान ऑफिसर की हत्या हो गई। अफगानी अधिकारियों ने मौत के कारण को तालिबान के तरफ से चल रही गोलीबारी के रूप में वर्णित किया है। हालांकि खुद रॉयटर्स अभी मामले को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने में असमर्थ है और अधिक से अधिक जानकारी जुटाने में लगी हुई है।

दानिश सिद्दीकी

रॉयटर्स के अनुसार सिद्दीकी ने शुक्रवार को उन्हे बताया था कि झड़प की रिपोर्ट करते समय उनके हाथ में छर्रे लगे थें। जिसका स्पिन बोल्डक से तालिबान लड़ाकों के पीछे हटने के बाद उपचार किया गया और वो ठीक भी हो रहे थें। रॉयटर्स के अध्यक्ष माइकल फ्रीडेनबर्ग और प्रधान संपादक एलेसेंड्रा गैलोनी ने अपने एक बयान में कहा है, “हम क्षेत्र में अधिकारियों के साथ काम करते हुए और अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।” साथ ही बयान में उन्होंने दानिश सिद्दीकी के लिए अपना शोक भी व्यक्त किया।

इससे दुर्भाग्यपूर्ण घटना से पहले दानिश ने अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से मुठभेड़ और संघर्ष की कई तस्वीरें और वीडियो सांझा कर रखी थी। जिनमे से कुछ वीडियो में साफ देखा जा सकता है की उनके काफिले पर पहले भी हमला हो चुका है। हालांकि अभी मामले का पूरा सच सामने आना बाकी है।

दानिश की कुछ चर्चित तस्वीरें …

दुनिया भर में अपने काम को लेकर मशहूर दानिश सिद्दीकी मौत पर देश विदेश से लोग उनके मौत पर अपने शोक व्यक्त कर रहे हैं। भारत में अफगानिस्तान के मौजूदा राजदूत फरीद ममुंडजे ने ट्वीट के जरिए अपनी संवेदना व्यक्त की, लिखा, “कल रात कंधार में एक दोस्त दानिश सिद्दीकी की मौत की खबर से गहरा दुख हुआ है। भारतीय पत्रकार और पुलित्जर पुरस्कार विजेता अफगान सुरक्षा बलों के साथ थे जब उन पर आतंकवादियों ने हमला किया था।”

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी दानिश सिद्दीकी के निधन पर, ट्वीट के माध्यम अपना शोक व्यक्त किया, “दानिश सिद्दीकी अपने पीछे असाधारण काम छोड़ गए हैं। उन्होंने फोटोग्राफी के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीता और कंधार में अफगान सेना के साथ कवरेज कर रहे थे… हार्दिक संवेदना।” इधर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी संवेदना व्यक्त की और भारत सरकार से सिद्दीकी के पार्थिव शरीर को वापस लाने की अपील की है।

दानिश की कला उनकी तस्वीरों में दिखती थी …

जामिया की छात्रा और एक्टिविस्ट नबिया खान ने भी अपनी भावनाओं को लोगों के बीच सांझा करते हुए लिखा, “मैं दानिश सिद्दीकी के मौत की दुखद खबर जानकर स्तब्ध हूं। वह फीचर फोटोग्राफी के लिए पुलित्जर जीतने वाले पहले भारतीय थे। वह इतने बहादुर थे कि यह उनके काम में झलकता था। उनके कामों को तब भी खामोश न कराया जा सका था जब वो जिंदा थें और अभी भी उनका काम अन्याय के खिलाफ जिंदा रहेगा। वो जिस चीज में सबसे अच्छे थे उसी के दौरान उनकी मृत्यु हुई है। उनके परिवार को इस विनाशकारी क्षति को सहन करने की शक्ति मिले।”

आईआईटी एलुमनाई आसिफ मुज्तबा में भी इस मौके पर अपने दुखद विचार लोगों के सामने रखे, “यह मेरे लिए बहुत बड़ी व्यक्तिगत क्षति है। पिछले महीने अफगानिस्तान के लिए रवाना होने से ठीक पहले रोहिंग्या राहत शिविर में उनसे मुलाकात हुई थी। एक विनम्र आत्मा और एक अद्भुत इंसान। अल्लाह आपको जन्नत उल फिरदौस दे।” अब तक हजारों लोग उनके मौत पर अपने दुख ज़ाहिर कर चुके हैं, जिसमे करेला के मुख्यमंत्री पिराई विजयान, राणा अय्यूब, रिफत जावेद, उर्मिला मातोंडकर, राणा सफ्वी, तेजस्वी यादव, एमके स्टालिन और अन्य शामिल हैं।

दानिश की एक हालिया तस्वीर

मुंबई के निवासी, दानिश सिद्दीकी ने जामिया मिलिया इस्लामिया से अर्थशास्त्र में डिग्री से अपना स्नातक पूरा किया था। फिर वहीं से उन्होंने एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर से मास कम्युनिकेशन में डिग्री भी हासिल की। एक टेलीविजन समाचार संवाददाता के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले सिद्दकी, 2010 में एक इंटर्न के रूप में रॉयटर्स में शामिल हो गए थें। उसके बाद से सिद्दीकी ने अफगानिस्तान और इराक में युद्ध, रोहिंग्या शरणार्थियों का संकट, भारत में कोरोनावायरस प्रकोप, हांगकांग का विरोध और नेपाल में भूकंप को कवर करके खूब नाम कमाया था।

2018 में, दानिश सिद्दीकी और उनके सहयोगी अदनान आबिदी रोहिंग्या शरणार्थी संकट का दस्तावेजीकरण करने की वजह से फीचर फोटोग्राफी के लिए पुलित्जर पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बने थें। उनके द्वारा खींची गई बहुत सी तस्वीरें वायरल हो रखी हैं।

उनकी मौत से पत्रकारों में ग़म का माहौल है …

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