पिलखुआ काण्ड में गौहत्या के प्रमाण नहीं : एस पी

आस मोहम्मद कैफ, TwoCircles.net 

पिलखुआ: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में पिलखुआ कस्बे में कासिम (50) को गौहत्या के शक में भीड़ द्वारा पीट पीट कर हत्या के मामले में जनपद के पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा के अनुसार मौके पर गौहत्या किये जाने को लेकर कोई प्रमाण नही मिले है. गौहत्या किये जाने की सिर्फ अफवाह फैलाई गई थी.


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इस अफवाह में कासिम की जान चली गयी. कासिम मरते वक़्त तक पानी के लिए तड़पता रहा और पानी मांगता रहा.

जहाँ कासिम की हत्या हुई हैं उस जगह से दादरी केवल तीस किलोमीटर की दूरी पर हैं. वही दादरी जहाँ 2015 में फ्रिज में गोमांस होने की अफवाह में अख़लाक़ को पीट पीट मार दिया गया था. स्थानीय लोगो की माने तो अख़लाक़ की हत्या में जेल गए लड़के पिलखुवा में भी घूमते है.

अब पिलखुआ काण्ड कोई साजिश थी या फिर भीड़ का उत्तेजित होने के कारण. पुलिस तफ्तीश कर रही हैं.

समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद गफ्फार मदेपुर और बझेड़ा (जहाँ कासिम की हत्या हुई) गाँव के बीच वाले गाँव देहरा में रहते है उनके अनुसार “बझेड़ा गाँव से शहर जाने का रास्ता मदेपुर और देहरा से होकर गुजरता है देहरा में फैक्ट्री होने के कारण के बझेड़ा के सैकड़ो लड़के यहाँ काम करते है मगर इस दिन ज्यादातर लड़के छुट्टी रहे और दोनों गाँवों से निकलकर बझेड़ा के लोग पिलखुवा कम गये.यह घटना 3 बजे हुई जबकि बझेड़ा के लोगो ने सुबह से ही गाँव से बाहर आना बंद कर दिया था जाहिर है अंदर कुछ चल रहा था”.

समयदीन (66) मदेपुर के रहने वाले है. ये कासिम को बचाने दौड़े थे लेकिन इन पर भी हमला कर के घायल कर दिया गया. यह मदेपुर गाँव घटनास्थल वाले बझेड़ा गाँव के एकदम पास में है दोनों गाँव के खेत खलिहान एक दूसरे से मिले हुए है. दोनों गाँव राजपूतो के है मदेपुर में मुस्लिम राजपूत रहते है जबकि बझेड़ा हिन्दू राजपूत बाहुल्य है. इनमे वर्चस्वता की लड़ाई रहती है. यहाँ अक्सर साम्प्रदायिक तनाव हो जाता है और दोनों गाँव में नफरत काफी बढ़ गई है. जिस समय भीड़ गाय काटने की अफवाह पर क़ासिम को पीट रही थी तो समयदीन अपने खेत पर काम कर रहे थे उन्होंने साहस करते हुए क़ासिम को बचाने की कोशिश की जिसके बाद उनकी भी पिटाई की गई जिससे वो बेहोश हो गए फिलहाल वो खतरे से बाहर है.यहाँ आपसी संबधों में काफी बिगाड़ आया है.स्थानीय निवासी मोहम्मद शाहीन हमें बताते है कि “यह ताल्लुक 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद ज्यादा खराब हुए हैं दरअसल इस चुनाव में धौलाना विधानसभा से पांच बार के सांसद रमेश चंद्र तोमर ने चुनाव लड़ा था जिन्हें बसपा के असलम चौधरी ने हरा दिया जबकि यहाँ योगी आदित्यनाथ और अमित शाह दोनों ने इस चुनाव को “मौलाना बनाम धौलाना” की उपमा देकर साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की थी. उसके बाद से ही रिश्तों में थोड़ी तल्खी है हालाँकि यह आम लोगो में नही है बस एक पार्टी के कार्यकर्ताओं में है. धौलाना के विधायक असलम चौधरी कहते हैं कि “जल्दी ही इस साजिश का पर्दाफाश हो जायेगा.यहाँ अमनपसंद लोग ज्यादा है और हिन्दू भाईयों ने शिद्दत से इस घटना की निंदा की है”.

इसी बात से क़ासिम के परिवार वाले भी सहमत है क़ासिम के सबसे बड़े बेटे महताब(24) बझेड़ा के भाजपा से जुड़े नेता किरणपाल के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कहते है.किरणपाल क़ासिम मौत से ठीक पहले एक वीडियो में क़ासिम से बात कर रहा है तभी भीड़ वीडियो बनाने वाले युवक के पीछे दौड़ती है.बझेड़ा गाँव में किरणपाल का ख़ासा दबदबा है और उसकी कई बीजीपी नेतागणों से नजदीकी है स्थानीय पिलखुवा थाने में भी उसकी धाक है.

हालाँकि उसका नाम मुक़दमे में नही है. हापुड़ के एसपी संकल्प शर्मा ने बताया कि समयदीन के भाई यामीन की और से 5 अज्ञात लोगो के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई है.

जिसके आधार पर पुलिस ने प्रकाश में आने पर राकेश और युद्धिठर की अब तक गिरफ़्तारी की है.शेष गिरफ़्तारी के लिए पुलिस प्रयास कर रही है किरणपाल की भूमिका की भी जांच की जा रही हैं. एसपी के अनुसार मौके पर गाय काटे जाने को लेकर कोई प्रमाण नही मिले है.गाय काटे जाने की सिर्फ अफवाह फैलाई गई.

पिलखुवा थाना में इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले समयदीन के भाई यामीन कहते है- “मतलब कहानी यह गढ़ी है कि एक बीमार और एक बूढ़ा आदमी दोनों मिलकर गाय काट रहे थे जबकि न उनके पास छुरी थी और न वहां गाय थी बात साफ़ सुथरी है यह गाय के नाम पर साज़िश कर दंगा कराने के लिए लिए हत्या है”. चार भाई वाले क़ासिम के एक और भाई मोहम्मद शाईक(45) के अनुसार”वो वहीँ मर चुके थे. आप वीडियो में देखिये कैसे तड़प रहे है जैसे बिना पानी के मछली तड़पती है.क्या 50 साल का थुलथुला बदन वाला अकेला आदमी गाय काट सकता है, फिर गाय कहाँ है?यह झूठी अफवाह फैलाकर दंगा कराने की नीयत से की गई साजिशजन हत्या है “.

घटना के बाद कासिम के घर के हालात बहुत ही दयनीय हैं. कासिम के 65 साल के चाचा मेहर अली अपने दोनों हाथो में सर पकडे पिलखुवा के मोहल्ला सिद्दीकनगर में क़ासिम के किराए के मकान वाले घर के बाहर बैठे है. क़ासिम का भाई मोहम्मद सलीम(35) बताते है वो कहते है”वो कहते है मेरे भाई गाँव में बकरी बच्चा खरीद कर शहर में बेचते थे यही उनके परिवार को पालने का जरिया था वो 23 साल पहले अपने पुश्तेनी गाँव ताड़ी से यहाँ चले आये थे.पिलखुवा में उनकी ससुराल है.बझेड़ा गाँव का कोई आदमी उनसे मिला था जिसने उन्हें गाँव में अपनी भैंस बेचने के लिए उन्हें बुलाया.ईद की वजह से वो तब नही जा सके कल वो गये थे.घर पुलिस उनकी लाश लेकर आई.” सोमवार को दोपहर बाद 3 बजे पुलिस ने घर फोन कर बताया की क़ासिम के साथ झगड़ा हुआ है उन्हें रामा हॉस्पिटल ले जाया गया जहाँ मृत घोषित कर दिया गया.

क़ासिम कुरैशी की सयानी हो रही बेटी निशा(17) अपने घर के दरवाजे पर उदास खड़ी है तीन दिन पहले की उसकी ईद मातम में बिगड गई है.शारिक हमे बताते है कि”क़ासिम बेटी को जवान होते देख परेशान रहता था वो जितना कमाता था उतना खर्च हो जाता था बेटी की शादी की चिंता उसे लगातार सता रही थी.बड़ा बेटा शादी के बाद अलग हो गया था.रोते हुए निशा कह रही थी “अब्बू ईद पर खुद नए कपडे नही बनाते थे मगर हमें दिलाते थे वो पुराने कपडे धुलवाकर पहन लेते थे,इन्हें भी कई कई दिन दिन तक पहने रखते थे

अब हमारे घर में कभी ईद नही आएगी”. क़ासिम का बेटा महताब इंसाफ मांग रहा है. क़ासिम के 6 बच्चो में चार तो यह भी नही जानते कि अब्बू कहां चले गए!

पिलखुवा हापुड़ जनपद का क़स्बा है पहले यह मेरठ जनपद में आता था बाद में ग़ाज़ियाबाद का हिस्सा बन गया फिर पंचशील नगर के नए नाम के साथ पिलखुवा को इस नए जिले में जोड़ दिया गया. दिल्ली से नैनीताल जाते हुए सड़क के किनारे जहाँ भी आपको बड़ी संख्या में तौलिया बिकते दिखाई पड़े तो समझ लीजियेगा यही वो जगह है जहाँ इंसानियत शर्मसार हुई और सैकड़ो लोगो की मौजूदगी में एक तड़पते हुए बीमार आदमी को एक घूंट पानी भी नही दिया गया.

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