बंगाल में दीदी को मुस्लिमों का एकतरफा समर्थन ,38 मुसलमान भी बने विधायक

स्टाफ़ रिपोर्टर।Twocircles.net

बंगाल में मुसलमानों ने ममता बनर्जी को एकतरफा वोट किया है। ममता बनर्जी की जीत की सबसे बड़ी वजह भी यही बात बनी हैं। बंगाल मे मुस्लिम बहुल इलाकों में तो ममता बनर्जी ने एकतरफा वोट हासिल की है। जैसे बीरभूम में तृणमूल कांग्रेस ने 11 में से 10 सीटों को जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। यहां 37 फीसद मुस्लिम आबादी है। अब यहां 38 मुस्लिम विद्यायक चुने गए हैं। मुर्शिदाबाद में 20 में से 16 सीटें, मालदा में 9 में से 5 और कोलकाता में सभी 9 एआईटीसी के पास गई है। यह सभी मुस्लिम बहुल इलाके है।


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भाजपा ने इस चुनाव में अपनी जीत के लिए विभाजन की राजनीति को अपनाया था और कई अवसर बनाए थे। ऐसे मुद्दों को उठाया जिससे बहुसंख्यक लोगों को अपने पक्ष में कर सके। वहीं ममता बनर्जी ने भी सारे दाव पेंच का जवाब पहले से तैयार रखा था जिसकी वजह से वो भारी बहुमत के साथ जीत सकी है।

9 करोड़ जनसंख्या वाले राज्य पश्चिम बंगाल में (2011 सेंसस के मुताबिक) तकरीबन 2 करोड़ 46 लाख मुस्लिम हैं। इसके बाद भी मुसलमानो का प्रतिनिधित्व जितना होना चाहिए उससे कहीं ज्यादा कम है। फिर भी यह अच्छा प्रदर्शन है। कुल 294 विधानसभा सीटों में मात्र 38 क्षेत्र ऐसे हैं जहां मुस्लिम जीतकर आए हैं। ये संख्या 2016 के चुनाव के मुकाबले काफी कम है, जब 55 मुस्लिम विधायक थे।

जीते हुए 38 मुसलमान विधायकों की सूची:

सौमिक हुसैन – रानीनगर

अब्दुल गनी – सुजापुर

अक्खरुज्जमा – रघुनाथजगंज

गुलशन मलिक – पंचला

शाहिना मुमताज बेगम – नाओडा

कोल्लोल खान – नकासीपारा

मुशर्रफ हुसैन – मुराराई

सबीना यासमीन – मोठाबारी

अब्दुल खलीक मोल्ला – मेटियाबुरुज

अब्दुल रहीम बोक्सी – मलातीपुर

गियासुद्दीन मोल्ला – मगरहत पश्चिम

मोहम्मद अली – लालगोला

तोरफ़ हुसैन मंडल – कुमारगंज

फिरहद हाकिम – कोलकाता पोर्ट

शेख शाहनवाज – केतुग्राम

जावेद अहमद खान – कस्बा

नसीरुद्दीन अहमद – कालिगंज

जाकिर हुसैन – जंगीपुर

अब्दुल रज्जाक – जलांगी

मोसर्रफ हुसैन – इटाहार

अब्दुल करीम चौधरी – इस्लामपुर

तजमुल हुसैन – हरीशचंद्रपुर

हाजी नुरुल इस्लाम – हरोआ

नियामोट शेख – हरिहरपाड़ा

गुलाम रब्बानी – गोलपोखड़

मोनीरुल इस्लाम – फरक्का

जफीकुल इस्लाम – डोमकाल

हुमायूं कबीर – डेबरा

रहीमा मंडल – देगंगा

हमीदुल रहमान – चोपड़ा

रूकबानूर रहमान – छपरा

मिन्हाजुल आरफीन आज़ाद – चाकुलिया

गाज़ी सहाबुद्दीन – कैनिंग पुरवा

हुमायूं कबीर – भरतपुर

रिजाउल करीम – भंगार

इदरीस अली – भागाबंगोला

क्वासी अब्दुल मलिक – बदुरिया

रफीकूर रहमान – अमडंग

तृणमूल कांग्रेस ने मुस्लिम पर पिछली बार से ज्यादा भरोसा दिखाया और परिणाम के तौर पर मुस्लिम विधायकों की वृद्धि भी हुई, जहां पिछली बार 29 मुस्लिम विधायक तृणमूल से जुड़े हुए थे तो इस बार ये संख्या बढ़कर कुल 38 मुस्लिम विधायक तक चली गई।

पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज लगभग 30 प्रतिशत मतदाता हैं। राज्य की तकरीबन 100 सीटों के लिए निर्णायक कारक भी साबित होते आए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, टीएमसी के अल्पसंख्यक गढ़ों को तोड़ने में नाकाम रही बीजेपी को उम्मीद थी कि आईएसएफ मुस्लिम वोटों का बंटवारा कर सकेगी। लेकिन ऐसा कुछ न हुआ। यही नहीं बिहार में अच्छा प्रदर्शन करने वाले ‘मजलिस ‘ का कोई भी प्रत्याशी तो एक हजार वोट का भी आंकड़ा नही छू पाया।

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